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अभी है ऑक्सीजन की ज्यादा जरूरत, पटाखे जलाकर इसे नष्ट न करें, संक्रमण का रहता है खतरा

Tue, 27 Oct 2020 07:57 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी

सार

  • प्रदूषण से कोरोना, हृदय, सांस रोगियों (अस्थमा) और ब्लड प्रेशर वालों को रहता है फेफड़े के संक्रमण का खतरा
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प्रदूषण - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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इस बार दीपावली केवल दीप जलाकर ही मनाएं तो यह मानवता की सेवा होगी। हमने और आपने अगर इस बार पटाखे जलाए तो कोविड 19 के दौर में यह धूमधड़ाका सभी के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। पटाखों से निकलने वाला जहरीला धुआं हवा में और जहर घोल देगा और ऑक्सीजन लेने में लोगों को दिक्कत होगी। पटाखे न जलाकर हम कई लोगों की जान जोखिम में डालने से बच जाएंगे।

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कोविड के दौर में फेफड़ों में संक्रमण के मामले अधिक बढ़ गए हैं। कोरोना संक्रमित होने से लेकर और निगेटिव होने तक वायरस का असर शरीर में रहता है। फेफड़े कमजोर हो जाते हैं और शरीर में ऑक्सीजन की कमी बनी रहती है। विशेषज्ञ चिकित्सक मानते हैं कि पटाखे जलाने से सल्फर डाईऑक्साइड, कार्बन डाईऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे जहरीले रसायन वातावरण में फैलने से ऑक्सीजन कम हो जाती है। एक छोटा पटाखा करीब दस लीटर और एक बड़ा पटाखा करीब सौ लीटर तक ऑक्सीजन को खत्म कर देता है। 

कोरोना के साथ ही हृदय रोगियों, ब्लड प्रेशर और सांस के रोगियों में जोखिम बढ़ सकता है और फेफड़े का संक्रमण होने का खतरा हो सकता है। पटाखों में प्रयोग किए जाने वाले रसायन बेहद खतरनाक होते हैं। इसके धुएं से हवा खराब होती है और लोगों की सांस नली में रुकावट, गुर्दे में खराबी, त्वचा संबंधी बीमारियां हो जाती हैं। इसके अलावा उच्च रक्तचाप, हृदयाघात का खतरा भी बढ़ जाता है। तो आइए संकल्प लें कि हम दीपों से दीपावली को रोशन करेंगे और पटाखे न जलाकर वातावरण को जहरीला होने से बचाएंगे।
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ये जहरीली गैसें हैं जानलेवा
-सल्फर डाईऑक्साइड और नाइट्रोजन डाईऑक्साइड : आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ, खांसी।
-कार्बन मोनोऑक्साइड : रक्त कोशिकाओं के जरिये ऑक्सीजन लेने की क्षमता को कम करना।
-सल्फर, लेड, क्रोमियम, कोबाल्ट, मरकरी, मैग्नीशियम : स्वस्थ व्यक्ति को तुरंत बीमार कर सकते हैं।

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अमर उजाला की अपील

दीपावली भले ही अभी एक महीना दूर है, लेकिन हम अभी से पटाखा नहीं जलाने का मन बनाएंगे तो पटाखों की बिक्री करने वाली भी मांग के हिसाब से ही माल कम मंगाएंगे। इस खबर का मकसद सिर्फ आपको यह बताना है कि सांसों का दुश्मन कोरोना वायरस प्रदूषण में और भी सक्रिय हो जाएगा और पटाखों से निकला जानलेवा धुंआ आपके किसी अजीज के लिए ही घातक साबित होगा।

विशेषज्ञ बोले, अगले चार माह तक हर तरह के प्रदूषण से बचें
सुशीला तिवारी अस्पताल के चिकित्साधीक्षक डॉ. अरुण जोशी का कहना है कि पटाखों से निकलने वाले रसायन बहुत ही घातक होते हैं। कोविड के साथ ही हृदय, बीपी, सांस के मरीजों में फेफड़े के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। कोविड से जंग लड़कर ठीक होने की दिशा में बढ़ रहे लोगों को भी दिक्कत हो सकती है। कोविड मरीजों के फेफड़ों की क्षमता कम हो जाती है।

वरिष्ठ श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव सिंघल का कहना है कि पटाखे का धुआं खतरनाक होता है। सीओपीडी, अस्थमा रोगियों में संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। पटाखों से निकलने वाले रसायन का धुआं वातावरण में घुल जाता है और लोगों को सांस लेने में तकलीफ होती है। कोविड 19 के दौर में प्रयास करना चाहिए कि किसी भी तरह के प्रदूषण से बचें।

राजकीय मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा के प्राचार्य और वरिष्ठ श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. आरजी नौटियाल का कहना है कि पटाखों से निकलने वाले रसायन वातावरण में मिल जाते हैं। सांस लेने के दौरान हमारे फेफड़ों में जाते हैं और ऑक्सीजन की मात्रा को कम करते हैं। उनका कहना है कि सभी को संकल्प लेना चाहिए कि कोविड 19 के दौर में सिर्फ दीपों के साथ दीपावली मनाएंगे और पटाखों को न कहेंगे। पीएम मोदी को भी लोगों से अपील करनी चाहिए कि इस बार पटाखे न जलाएं।

वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. रमनदीप आहूजा का कहना है कि पटाखों से निकलने वाले रसायन में एसपीएम (सस्पेंडेट पार्टीकुलेट मैटिरयल) स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक है। यह फेफड़ों में पहुंचकर फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। साथ ही कैंसर का कारण बनता है। फेफड़ों को नुकसान पहुंचने से हृदय पर इसका दबाव बनता है और हृदय को अपनी क्षमता से अधिक काम करना पड़ता है।

आईवीआरआई मुक्तेश्वर के प्रभारी पुतान सिंह का कहना है कि पटाखों से निकलने वाले रसायन फेफड़ों से होते हुए शरीर के अंदर जाते हैं, जिससे सांस लेने संबंधी कई परेशानियां हो सकती हैं। उल्टी, घुटन, सिर दर्द, आंखों में जलन हो सकती है। कैंसर की आशंका भी अधिक रहती है। कुछ रसायन सल्फूयरिक अम्ल में परिवर्तित होकर बारिश की बूंदों के साथ पृथ्वी पर गिरते हैं और जमीन की उर्वरता को कम करते हैं।
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