जिलाधिकारी दीपक रावत अचानक तहसील पहुंचे तो स्टांप वेंडरों में भगदड़ मच गई। अधिकांश वेंडर अपने बस्ते छोड़कर भाग खड़े हुए। लेकिन क्यों? ऐसा क्या हो रहा था वहां जो वहां डीएम को देखते ही भगदड़ मच गई।
दरअसल, वहां प्रमाणपत्र के आवेदन फार्म के लिए भी तहसील परिसर में लोग भटकते मिले। डीएम के मांगने पर खुद तहसीलदार भी तत्काल फार्म उपलब्ध नहीं करा सकीं।
डीएम ने तहसीलदार को अव्यवस्थाओं पर फटकार लगाते हुए गैर हाजिर स्टांप वेंडरों को नोटिस जारी किए हैं। साथ ही जाति, मूल निवास और आय प्रमाण पत्रों के फार्म जनाधार केन्द्रों पर निशुल्क देने के निर्देश दिए हैं।
डीएम दीपक रावत जैसे ही तहसील में दाखिल हुए स्टांप वेंडर अपने अपने बस्ते छोड़कर भागने लगे। यह नजारा देखकर डीएम ही नहीं तहसील पहुंचे फरियादी भी हैरत में पड़ गए।
पूरी तहसील में करीब 22 स्टांप वेंडर बताए जाते हैं, इनमें केवल दो स्टांप वेंडर ही अपने बस्तों पर बैठे पाए गए। इसके बाद डीएम प्रमाण पत्र बनाने वाले जनाधार केंद्रों पर पहुंचे।