यूं तो कोरोनेशन अस्पताल को कागजों में जिला अस्पताल का दर्जा हासिल है, लेकिन सुविधाओं के लिहाज से अब भी यहां कुछ भी नहीं हैं। अस्पताल में आईसीयू भी अब तक शुरू नहीं हो पाया है।
कोरोनेशन अस्पताल और गांधी शताब्दी अस्पताल परिसर को मिलाकर लगभग दो साल पहले राज्य सरकार की ओर से शासनादेश जारी कर राजकीय जिला अस्पताल घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद अस्पताल परिसर में जिला स्तर की विभिन्न सुविधाएं नहीं हैं। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अस्पताल में 10-10 बेड के आईसीयू (इंटेसिव केयर यूनिट) और एचडीयू (हाई डिपेंडेंसी यूनिट) बनाए गए थे। आईसीयू बने जहां दो महीने से ज्यादा समय हो गया है, लेकिन अभी तक इसे शुरू नहीं किया जा सका है। इससे गंभीर मरीजों को राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल या निजी अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
अस्पताल में सीटी स्कैन भी नहीं हो पा रहा है। सीटी स्कैन मशीन को स्थापित तो किया गया है, लेकिन अभी मरीजों की जांच शुरू नहीं हो पाई है। वहीं, अस्पताल में ब्लड बैंक तक नहीं है। जिला अस्पताल के गांधी शताब्दी अस्पताल परिसर में एक साल पहले ब्लड स्टोरेज केंद्र बनाया गया था, लेकिन इसमें ज्यादा समय तक और अधिक यूनिट ब्लड नहीं रख सकते। ब्लड के लिए भी मरीजों को दून अस्पताल या दूसरे निजी ब्लड बैंकों पर निर्भर रहना पड़ता है।
जिला अस्पताल में आईसीयू में कुछ कार्य होना बाकी है। इसे जल्द शुरू किया जाएगा। इसके अलावा सीटी स्कैन मशीन के लिए रेडिएशन संबंधी अनुमति मिलते ही जांच शुरू कर दी जाएगी। ब्लड बैंक के लिए दोनों परिसरों में जगह की कमी है।
- डॉ. शिखा जंगपांगी, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल