भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी दिल्ली में छात्रों के बीच ‘देवालय से पहले शौचालय’ का बयान देकर विवादों में फंस गए हैं।
विहिप द्वारा बयान की निंदा
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने भी बयान की निंदा की। बोले कि वह भी बेहतर शौचालय व्यवस्था के पक्ष में हैं, लेकिन इस मसले पर जिस तरह मंदिर को घसीटा गया, वह सही नहीं। उन्होंने इसे हिंदू समाज का अपमान करार दिया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसी तरह का बयान दिया था तब भाजपा ने उनकी घोर निंदा की थी। इसी तरह उसे नरेंद्र मोदी के बयान को भी लेना चाहिए। अलबत्ता, दून के बौद्धिक, धर्म से जुड़े लोगों की मानें तो देवालय, शौचालय की बहस ही बेकार है। दोनों की कोई तुलना नहीं। विकास अहम मुद्दा है, ध्यान इसी पर केंद्रित होना चाहिए।
शौचालय अपनी जगह है और देवालय अपनी जगह। किसी भी राजनेता को इस तरह से दोनों की तुलना नहीं करनी चाहिए। जरूरत के अनुसार विकास कार्य किया जाना सही है।
- आचार्य भरत राम तिवारी
मंदिर जरूरी हैं, लेकिन शौचालय बनाया जाना बेहद जरूरी है। अक्सर गांव में महिलाओं को शौच के लिए बाहर का रूख करना पड़ता है। महिलाओं के लिए मोबाइल शौचालय तो जगह-जगह होने चाहिए।
- साधना शर्मा
राजनेता तो कुछ भी कहते हैं। मैं मोदी की बात से सहमत हूं। शौचालयों की आवश्यकता है। बोल तो सभी देते हैं लेकिन काम कोई नहीं कराता। जगह-जगह शौचालय तो होने ही चाहिए।
- कमला पंत
फेसबुक पर राय देने के लिए क्लिक करें...