नई दिल्ली में अपर स्थानिक आयुक्त पद पर तैनात डॉ. मृत्युंजय मिश्रा को उत्तराखंड सचिवालय में तैनात करने को लेकर बवाल खड़ा हो गया है।
सचिवालय संघ ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री के करीबी अफसर के संरक्षण में मिश्रा को विश्वकर्मा भवन के पांचवें तल पर बैठाने की तैयारी है। उनके लिए कैंप कार्यालय के नाम पर कक्ष आवंटित किया गया है। संघ ने इस मामले को मुख्यमंत्री के पास उठाने और आंदोलन की चेतावनी दी है।
उत्तराखंड सचिवालय संघ की मानें तो स्थानिक आयुक्त कैंप कार्यालय खोलने के नाम पर मिश्रा को सचिवालय में लाया जा रहा है। संघ ने मिश्रा की सचिवालय में एंट्री का कड़ा विरोध करते हुए उनकी अपर स्थानिक आयुक्त पद पर तैनाती के आदेश पर भी सवाल उठाए हैं और इसे नियम विरुद्ध करार दिया है।
बता दें कि पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा गर्म है कि डॉ. मृत्युंजय मिश्रा को सचिवालय के विश्वकर्मा भवन के पंचम तल पर बैठाने की कवायद गुपचुप तरीके से चल रही है। अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश के ठीक सामने स्थित गैलरी में उन्हें एक कक्ष भी आवंटित कर दिया गया है। इसके बाद से सचिवालय संघ की त्योरियां चढ़ी हुई हैं। संघ के पदाधिकारियों की आपात बैठक हुई। बैठक में गैर सचिवालय के अधिकारी को गैरकानूनी व गुपचुप ढंग से सरकारी कक्ष दिए जाने पर कड़ी नाराजगी जाहिर की गई।
रहस्यमयी तरीके से हुए हैं आदेश
डॉ. मृत्युंजय मिश्रा के अपर स्थानिक आयुक्त नई दिल्ली के पद पर हुए तैनाती आदेश भी बेहद रहस्यमय तरीके से हुए हैं। हैरानी की बात यह है कि उनके तैनाती आदेश से सामान्य प्रशासन अनुभाग तक बेखबर है। आरटीआई से प्राप्त तैनाती आदेश में अंकित पत्रांक सामान्य प्रशासन अनुभाग के पत्रांक से एकदम भिन्न हैं। मसलन, दो जनवरी 2017 को मुख्य सचिव द्वारा जारी कार्यालय ज्ञाप का पत्रांक 1500/(1)/ 65(सा.)/2016 है। अनुभाग से जारी होने वाले पत्रों में सबसे ऊपर उत्तराखंड शासन और उसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग या अनुभाग अंकित होता है।
मगर मिश्रा के तैनाती आदेश में सामान्य प्रशासन विभाग के बाद उत्तराखंड शासन लिखा गया है। दिनांक 30 दिसंबर तक अनुभाग से जो पत्र जारी हुए उसका कार्यालय डिस्पैच रजिस्टर के क्रमांक एक से लेकर 1529 था। उत्तरांचल कार्य बंटवारा नियमावली-2006 के अनुसार सभी अनुभागों को पत्रांकों के कोड आवंटित हैं। सामान्य प्रशासन विभाग का ट्रिपल एक्स आई (15) कोड दर्ज है। उसका हर पत्र इसी कोड से आरंभ होता है। नए वित्तीय वर्ष में क्रमांक संख्या दोबारा एक क्रमांक से आरंभ होती है। डॉ. मिश्रा के तैनाती आदेश का पत्रांक 1500 से आरंभ हुआ है।
मूल पत्रावलियां भी हैं गायब
सामान्य प्रशासन विभाग से डॉ. मृत्युंजय मिश्रा की तैनाती से संबंधित मूल पत्रावलियां तक का कुछ अता-पता नहीं है। आरटीआई से प्राप्त टिप्पणी एवं आदेश में इस बात का उल्लेख है। इसमें सामान्य प्रशासन विभाग का कहना है कि 21 दिसंबर, 2016 को सचिवालय प्रशासन विभाग से डॉ. मिश्रा की मूल पत्रावली की मांग की गई थी। सचिवालय प्रशासन ने अवगत कराया कि इस संबंध में कोई मूल पत्रावली सचिवालय प्रशासन विभाग में उपलब्ध नहीं है। अब सवाल यह है कि डॉ. मिश्रा की अपर स्थानिक आयुक्त की तैनाती की मूल प्रतियां कहां गायब हो गई?
अपर स्थानिक आयुक्त बनाने की बेताबी पर सवाल
आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, डॉ. मृत्युंजय मिश्रा को रेजीडेंट कमिश्नर नई दिल्ली के पद पर तैनात करने के लिए लंबे समय से प्रयास चल रहे थे। 21 सितंबर 2016 को सीएस ने अनुशंसा की और तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अनुमोदन किया। औपचारिक आदेश के लिए फाइल 22 सितंबर को सामान्य प्रशासन विभाग पहुंची, लेकिन औपचारिक नियुक्ति आदेश निर्गत नहीं हुए। इसके बाद 26 दिसंबर को मुख्यमंत्री ने नियुक्ति आदेश तत्काल निर्गत करने के आदेश दिए। सवाल यह भी है कि आखिर मृत्युंजय की तैनाती को लेकर ये बेताबी क्यों थी?
तैनाती आदेश में कुलसचिव बनाए रखा
अपर स्थानिक आयुक्त (37400-67000 ग्रेड वेतन-10000) के पद पर डॉ. मिश्रा की तैनाती आदेश में उन्हें आयुर्वेद विवि के कुलसचिव पद का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, लेकिन आयुष मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने उन्हें कुलसचिव पद से हटा दिया।
विवादों से रहा है लंबा नाता
- आयुर्वेद विवि के कुलपति से विवादों को लेकर सुर्खियों में रहे।
- मिश्रा की नियुक्ति पर राजभवन ने सवाल उठाए और शासन को कार्रवाई के लिए कई पत्र भेजे।
- पूर्व मुख्यमंत्री ने उन्हें कुलसचिव पद से हटाने के आदेश जारी किए।
- विवि के तत्कालीन कुलपति डॉ. सौदान सिंह ने भी उन्हें पद से हटा दिया।
- परम हिमालय होम्योपैथिक मेडिकल कालेज के छात्रों ने भी धमकाने का आरोप लगाया।
मुख्य स्थानिक आयुक्त को सचिवालय में कैंप आफिस बनाने के लिए कक्ष आवंटित किए जाने की मांग सचिवालय प्रशासन से की गई थी, इस पर विचार के बाद विश्वकर्मा भवन में पंचम तल पर कक्ष आवंटित कर दिया गया है।
- आनंदबर्द्धन, सचिव, सचिवालय प्रशासन विभाग