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उमा भारती की वजह से बढ़ गया केदारनाथ विवाद

Thu, 18 Sep 2014 11:04 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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केदारनाथ के पुनर्निर्माण का मामला सुलझने के बजाय और उलझ गया है। बुधवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत को कहना पड़ा कि बीच का रास्ता निकाला जाएगा।
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हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि बीच का रास्ता क्या होगा। तीर्थ-पुरोहित केदारनाथ में आपदा से पूर्व के स्थान पर ही केदार धाम बसाने की मांग कर रहे हैं।

विशेषज्ञ इससे सहमत नही है। उत्तराखंड के दौरे पर पहुंची केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने भी इस विवाद को यह कहते हुए हवा दी कि केदारनाथ से मानव आबादी को दूर ही रखा जाए। केदार धाम बसाने के मामले में प्रदेश सरकार ने पहले बड़ी लिंचोली की जगह तय की थी।

पर केदारनाथ से सीधे जुड़े तीर्थ पुरोहितों को सरकार का यह प्लान पसंद नही आया। इनकी ओर से विरोध होने पर प्रदेश सरकार का रुख नरम पड़ा। पर उत्तराखंड दौरे पर आईं केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने इस विवाद को एक बार फिर हवा दे दी।
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'दोनो पक्षों से बात की जाएगी'

उमा भारती ने साफ तौर पर यह कहा कि केदारनाथ को उसके वास्तविक स्वरूप में ही रहने दिया जाए। ऐसे में प्रदेश सरकार को भी इस मामले में लचीला रुख अपनाना पड़ रहा है।

बुधवार को बीजापुर गेस्ट हाउस में मीडिया से मुखातिब मुख्यमंत्री हरीश रावत को कहना पड़ा कि समन्वय बनाया जाएगा। रावत ने कहा कि दोनो पक्षों से बात की जाएगी। तीर्थ-पुरोहितों को कहा जाएगा कि विशेषज्ञों की राय को भी ध्यान में रखें।

मुख्यमंत्री के मुताबिक जल्द ही केदारधाम के पुनर्निर्माण का प्लान सबके सामने रख दिया जाएगा। कैबिनेट में यह प्लान रखा जाएगा। इसके बाद केदारनाथ में पहुंचकर ही इस योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा।

मुसीबत यह है कि केदारनाथ में ही कैबिनेट की बैठक नहीं हो पाई थी। कैबिनेट की केदारनाथ में बैठक कैबिनेट मंत्री हरक सिंह को रास नहीं आई थी।

पुनर्निर्माण को तीन हजार करोड़ से अधिक

उत्तराखंड सरकार को पुनर्निर्माण पैकेज में चार धाम सड़कों के लिए वाह्य साहयतित योजनाओं, केंद्र वित्त पोषित योजना, राज्य आपदा प्रबंधन राहत निधि आदि में तीन हजार करोड़ रुपए से अधिक राशि स्वीकृत हुई है।

पुनर्निर्माण के लिए एक हजार करोड़ से अधिक के प्रस्ताव (डीपीआर) केंद्र को भेजे गए हैं। इसके अलावा केंद्र ने सड़कों के रखरखाव के लिए 220 करोड़ रुपए जारी किये हैं, जिसके माध्यम से सीमा सड़क संगठन कार्य कर रहा है।

राज्य सरकार सड़क निर्माण के लिए केंद्र के पास मजबूती से पैरवी करती रही है, लेकिन डीपीआर भेजने में देरी के चलते पुनर्निर्माण का कार्य लटका हुआ है।

पुनर्निर्माण पैकेज के तहत अगले तीन वर्ष तक केंद्र किश्तों में राशि करेगा। सीएम हरीश रावत सड़क पुनर्निर्माण के लिए केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गड़करी से मुलाकात कर चुके हैं, जबकि सचिव स्तर पर लगातार वार्ता हो रही है।
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अगला सीजन पड़ेगा भारी

ऋषिकेश बदरीनाथ सहित अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर रिअलाइनमेंट सहित सुरंग निर्माण सहित कई परियोजनाओं के डीपीआर अभी तैयार हो रही है। इन डीपीआर को केंद्र से स्वीकृति मिलने में समय लगेगा।

हालांकि राज्य सरकार अक्टूबर नवंबर से सड़क निर्माण में तेजी लाने के प्रयास में है। इसके साथ मार्च 2015 के बाद बीआरओ के बदले दूसरी निर्माण एजेंसी को सड़कें सौंपने से दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

मौसम की मेहरबानी पर निर्भर
बदरीनाथ धाम के अगले वर्ष कपाट खुलने तक सरकार के पास सड़क निर्माण का कार्य पूरी तरह से मौसम पर निर्भर करेगा। दिसंबर से फरवरी तक मौसम सड़क निर्माण के अनुकूल नहीं होता है। ऐसे में चार से पांच माह का समय ही निर्माण एजेंसियों को मिल पाएगा।
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