सेवा निवृत्ति की आयु बढ़ाने को लेकर कर्मचारी संगठन भी आमने-सामने हैं। फेडरेशन ऑफ मिनिस्ट्रीयल सर्विसेज एसोसिएशन ने सेवानिवृत्ति की आयु 60 से बढ़ाकर 62 करने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। उधर, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद इस मामले को लेकर राज्य सरकार पर दबाव बनाए हुए है।
मिनिस्ट्रीयल फेडरेशन के मीडिया प्रभारी पंचम बिष्ट का कहना है कि सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने का मतलब बेरोजगारों को नुकसान पहुंचाना है। प्रदेश में करीब 60 हजार पद रिक्त हैं। अगले दो साल में करीब 15 हजार कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
इन रिक्त पदों पर नियुक्ति होती है तो सीधा फायदा बेरोजगारों को मिलेगा। बिष्ट का कहना है कि सेवानिवृत्ति की आयु सीमा बढ़ाई गई तो फेडरेशन आंदोलन करेगा।
उधर, सेवानिवृत्ति आयु सीमा बढ़ाने का समर्थन कर रही राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष प्रहलाद सिंह का कहना है कि यह बंदिश सिर्फ कर्मचारियों पर ही क्यों है। अधिकारी किसी न किसी रूप में समायोजित हो जा रहे हैं। महाविद्यालयों के शिक्षकों को 65 वर्ष तक काम करने की छूट है।
वहीं, परिषद का दूसरा तर्क यह है कि सरकारी सेवा में न्यूनतम आयु सीमा 40 से बढ़ाकर 42 वर्ष कर दी गई है। अगर 42वें वर्ष में सरकारी सेवा में आने वाला व्यक्ति 60 वर्ष की आयु पर सेवानिवृत्त होता है तो उसकी सेवा कुल मिलाकर 18 साल की ही होगी। 20 साल पूरे न होने पर उसे ग्रेच्यूटी का लाभ नहीं मिल पाएगा।
फेडरेशन के विरोध को भी परिषद अध्यक्ष ने सिरे से खारिज किया और कहा कि फेडरेशन को इसका विरोध पहले करना चाहिए था।