दून अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती दो माह के बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टरों व स्टाफ नर्स पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया।
इतना ही नही नवजात के परिजनों ने आरोप लगाया कि बच्चे का इलाज करने के बजाए ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों व स्टाफ नर्स ने उसे रेफर कर दिया जिसके चलते मां बच्चे को लेकर चार घंटे तक अस्पताल के गेट पर बैठी रही और इलाज के अभाव मेें बच्चे दम तोड़ दिया। आखिरकार हंगामे की जानकारी पाकर पुलिस मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को संभाला। जहां नवजात के परिजनों ने अस्पताल के डाक्टरों पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
घटनाक्रम के मुताबिक क्लेमेंटाउन निवासी राजू के दो माह के बेटे शिवा को दून अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में रविवार को अपराहन ढाई बजे भर्ती कराया गया था। लेकिन इलाज के दौरान अचानक उसकी तबियत बिगड़ गई तो ड़्यूटी पर तैनात डॉक्टरों ने अन्य अस्पताल को रेफर कर दिया। आखिरकार सांय पांच बजे बच्चे की मौत हो गई। जिस समय बच्चे की मौत हुई, पिता राजू घर सामान लेने गया था जबकि उसकी पत्नी पूजा अस्पताल में बच्चे के साथ थी। नवजात की मौत के बाद परिजनों ने ड़्यूटी पर तैनात डाक्टरों व स्टाफ नर्स में इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया।
मामला तूल पकड़ता इससे पहले ही किसी ने घटना की जानकारी पुलिस को दे दी। आखिरकार मौके पर पहुंची पुलिस ने हंगामा कर रहे परिजनों को जैसे तैसे समझा बुझाकर स्थिति को संभाला। जहां एक तरफ परिजनों का आरोप है कि डाक्टरों द्वारा इलाज में लापरवाही बरती गई और वह चार घंटे तक मृत बच्चे के साथ अस्पताल के गेट पर बैठी रही। वहीं अस्पताल के डॉक्टराें ने आरोपों को बेबुनियाद बताया।
ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों का कहना था कि नवजात निमोनिया बीमारी से पीड़ित था और बेहद गंभीर गंभीर स्थिति में अस्पताल लाया गया था। उल्लेखनीय है कि यह पहली घटना नहीं है जब किसी मरीज की मौत केबाद परिजनों ने दून अस्पताल में हंगामा किया है। दूसरी ओर इस संबंध में जब अस्पताल के सीएमएस डॉ. केके टम्टा से उसका पक्ष जानने की कोशिश की गई तो संपर्क नही हो सका।