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सड़क पर 'भिड़े' दो विभाग

Sat, 31 Aug 2013 12:00 PM IST
अमर उजाला, अजित सिंह राठी, देहरादून
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उत्तराखंड में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से पिछले दस साल से सभी मुंह फेरे थे। लेकिन प्रधानमंत्री के नाम पर चलने वाली इस योजना के जैसे ही दिन फिरे, दो बड़े विभाग इसके फेर में पड़ गए हैं।
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मामला तनातनी तक पहुंच गया है। वजह है योजना की कीमत बढ़ना। ग्राम्य विकास विभाग की देखरेख में गांवों में सड़क बनाने वाली प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का बजट अभी तक आकर्षक नहीं था, लेकिन अब इस मद में भारी-भरकम रकम आने से एक दूसरा विभाग पीडब्ल्यूडी इस योजना की सरपरस्ती की फिराक में है।

यह महकमा मुख्यमंत्री के अधीन होने से जोर-आजमाइश रोमांचक हो गई है। योजना हाथ से न जाने देने के लिए ग्राम्य विकास मंत्री प्रीतम सिंह कमर कस चुके हैं।

इस मूल्यवान योजना के तहत 2015 तक वर्ल्ड बैंक के 1500 करोड़ और सामान्य बजट के 350 करोड़ रुपये खर्च होने हैं, केंद्र से भी कुछ अतिरिक्त राशि मिलने की संभावना है जबकि पिछले दस साल में इस योजना को महज 1200 करोड़ ही मिले।
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पीडब्ल्यूडी के अधीन थी
बताया जा रहा है कि योजना को लगभग दो हजार करोड़ रुपये मिलने का रास्ता साफ होते ही पीडब्ल्यूडी के पैरोकारों ने योजना को ग्राम्य विकास से हटाकर अपने विभाग के तहत लाने के लिए यह तर्क दिया कि पिछली कांग्रेस सरकार में भी यह योजना पीडब्ल्यूडी के ही अधीन थी।

रास्ता साफ करने के लिए सबसे पहले योजना के चीफ इंजीनियर केके जैन को हटाने का आदेश दिया गया। खबर लगते ही विभागीय मंत्री प्रीतम सिंह ने विरोध जताया तो फैसला वापस हो गया। फिर बदली रणनीति के तहत विभाग से ही प्रस्ताव चलवाने की योजना बनी।

सूत्रों ने बताया कि एक चर्चित नौकरशाह व एक खास विधायक ने विभागीय अफसरों पर दबाव बनाया और विजिलेंस जांच कराने की धमकी तक दी गई। इस मुहिम को उच्च स्तर की सहमति बताई जा रही है। इस मामले में मंत्री के खुलकर विरोध जताने की संभावना भी है।
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