कांग्रेसी विधायकों के बाद अब देहरादून के मेयर विनोद चमोली एमडीडीए पर हमलावर हो गए हैं। उनका कहना है कि पार्कों के मामले में एमडीडीए ने भारी खेल खेला है।
यह खेल लंबे समय से जारी है। इसलिए पार्कों से संबंधित कार्यों की जांच होनी चाहिए। जवाब में एमडीडीए वीसी ने मेयर पर तीखा हमला किया है। उनका कहना है कि वह निगम की नाकामी को ढो रहे हैं।
बुधवार को मेयर विनोद चमोली ने मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) पर पार्कों में करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगाया। इस बाबत मेयर ने एमडीडीए उपाध्यक्ष आर मीनाक्षी सुंदरम को कड़ा पत्र लिखा है। मेयर ने पार्कों के संबंध में सूचनाएं मांगी हैं। दूसरी ओर, एमडीडीए उपाध्यक्ष ने भी मेयर पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि बेहतर हो नगर निगम अपने पार्क ले ले। निगम की अक्षमता की वजह से हम पार्कों को ढो रहे हैं।
एमडीडीए उपाध्यक्ष को लिखे पत्र में मेयर विनोद चमोली ने पार्कों के संबंध में सवाल किये हैं। पूछा है कि एमडीडीए ने कितने पार्कों को सुंदर बनाया और उन पर कितना खर्च किया है? साथ ही पार्कों में अन्य कार्य का भी ब्यौरा दें। मेयर ने तीन दिन में ब्योरा मांगा है। मेयर ने लिखा है कि उन्हें निर्माणाधीन पार्कों का विवरण स्वीकृत व्यय सहित भेजें।
साथ ही निर्माण व सुंदरीकरण के लिए प्रस्तावित पार्कों का विवरण भी दें। स्वीकृत धनराशि का विवरण मांगा गया है। यह भी पूछा है नगर निगम से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया गया है कि नहीं। मेयर का कहना था कि हमारे पार्कों के हर आयाम पर एमडीडीए ने करोड़ों रुपये का घोटाले किए हैं। पार्कों का मैटेरियल ही बेशकीमती है।
एमडीडीए ने उसी में खेल खेला है। दूसरी तरफ, एमडीडीए उपाध्यक्ष आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि जितना जल्दी हो सके नगर निगम अपने पार्क वापस ले ले। पार्कों का रख रखाव करना हमारा काम नहीं है। चूंकि नगर निगम अपने पार्कों का संचालन नहीं कर पा रहा था। इसलिए मजबूरी में हम पार्कों का रखरखाव कर रहे हैं।
सांसदों और विधायकों पर मेयर ने चला दांव
मेयर विनोद चमोली अब कानून-नियमों को आधार बनाकर सांसदों-विधायकों पर आक्रामक हो गये हैं। उन्होंने ऐसा दांव चला है जिससे नगर निगम ताकतवर होगा और सांसदों व विधायकों के लिए काम कराना मुश्किल हो जाएगा। इससे पार्षदों को ताकत मिलेगी।
मेयर ने नगर आयुक्त नितिन भदौरिया को पत्र लिख निर्देश दिए हैं कि सांसद व विधायक अगर अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर जल्द कार्य नहीं करते हैं तो उनका एनओसी रद्द किया जाए। मेयर ने नगर आयुक्त को निर्देशित किया है कि सांसद-विधायक निधि से प्रस्तावित कार्य में साफ तौर पर वार्ड, स्थान, मार्ग का नाम तथा निर्माण कार्य कहां से कहां प्रस्तावित है का विवरण एनओसी के लिए प्राप्त पत्र में होने पर ही एनओसी दी जाए।
पत्र में लिखा गया है कि उस एनओसी की वैधता एनओसी के निर्गत होने की तिथि से अधिकतम छह महीने तक ही होगी। मेयर ने निर्देश दिए हैं कि सांसद व विधायक निधि के अतिरिक्त नगर निगम क्षेत्र में अन्य विभागों द्वारा योजनाओं व मदों से प्रस्तावित निर्माण कार्य विभाग से सीधे निगम को एनओसी के लिए पत्र प्राप्त होने पर ही परीक्षण कराकर एनओसी संबंधित विभाग को जारी की जाए।
मलिन बस्तियों पर भाजपा कांग्रेस में फिर जंग
मलिन बस्तियों के नियमितीकरण पर भाजपा और कांग्रेस में फिर जंग छिड़ गई है। भाजपा ने कांग्रेस पर मलिन बस्ती के लोगों को वोट के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस की वादाखिलाफी के खिलाफ भाजपा ने 26 फरवरी को सचिवालय घेराव का ऐलान किया है। उधर, कांग्रेस ने आगामी कैबिनेट में मलिन बस्तियों के नियमितीकरण का फैसला होने का दावा करते हुए भाजपा पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया है।
प्रदेश में मलिन बस्तियों के नियमितीकरण के मुद्दे पर राजनीतिक बढ़त लेने के लिए भाजपा और कांग्रेस लंबे समय से एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रही हैं। बुधवार को भाजपा महानगर कार्यालय में मेयर विनोद चमोली ने कांग्रेस सरकार पर तीखे प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि सरकार मलिन बस्तियों के नियमितीकरण के मसले को लटकाकर प्रदेश के विकास में बाधक बन रही है।
भाजपा महानगर अध्यक्ष उमेश अग्रवाल ने भी कांग्रेस पर मलिन बस्ती वालों से धोखा करने का आरोप लगाते हुए 26 फरवरी को सचिवालय घेराव के लिए कार्यकर्ताओं को लामबंद होने का आह्वान किया।
राज्य सरकार न तो मलिन बस्तियों का नियमितीकरण कर रही है और न नगर निगम को हाउस टैक्स लगाने की अनुमति देने को तैयार है। उल्टा कांग्रेस के विधायक और मंत्री अनर्गल बयानबाजी कर मलिन बस्ती वालों को गुमराह कर रहे हैं। भाजपा इसके विरोध में आंदोलन के लिए तैयार है।
- विनोद चमोली, मेयर