देहरादून। उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) की महिला प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित सम्मेलन में मुख्य अतिथि एवं राज्य आंदोलनकारी सुशीला बलूनी ने कहा कि देश में 50 फीसदी महिला आबादी होने के बावजूद आज भी महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा के सवाल पर चर्चा हो रही है जो आश्चर्यजनक पहलू है।
बलूनी ने कहा कि देश की महिलाएं राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री जैसे पदों पर आसीन होकर देश की सेवा करने के साथ ही हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं। महारानी लक्ष्मीबाई से लेकर चिपको आंदोलन की जनक गौरा देवी, राज्य आंदोलनकारियों राज्य आंदोलन के दौरान में अपनी जान की कुर्बानी देने हंसा धनाई, बेलमती चौहान का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। ये महिलाएं साहस प्रतीक हैं और देश की महिलाओं को इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।
राज्य आंदोलनकारी सरिता गौड़ ने कहा कि अपने अधिकारियों के लिए महिलाओं को मानसिक तौर पर मजबूत बनाना होगा। महिलाओं को अपने बच्चों में अच्छे संस्कार देकर उन्हें एक आदर्श नागरिक बनाने के लिए आगे आना होगा। सम्मेलन की अध्यक्ष प्रमिला रावत ने कहा कि महिला सशक्तिकरण और महिला सुरक्षा पर उत्तराखंड क्रांति दल हमेशा महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष करता रहा है। समाज में महिलाओं को सुरक्षित अधिकार संपन्न बनाना हर नागरिक का कर्तव्य है। निर्मला बिष्ट ने कहा कि मातृशक्ति के बदौलत ही राज्य का गठन हुआ है। अत्याचारों के खिलाफ सभी महिलाओं को एकजुट होना होगा। सम्मेलन में निशा अतुल्य, ऊषा भट्ट, अल्पना जदली, प्रमिला राठौर, मीनाक्षी घिल्डियाल, इंदु नवानी, प्रियंका शर्मा, चंद्रा सुंदरियाल, शकुंतला रावत, प्रीति नेगी समेत कई महिलाओं ने संबोधित किया।