मंदिर को जोड़ने वाली आसीसी पुलिया यमुना के उफान में बह गई।
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मानसून सीजन के चलते आजकल कम तीर्थयात्री ही यमुनोत्री धाम की ओर जा रहे हैं। सोमवार को राजस्थान के आठ तीर्थयात्री यमुनोत्री पहुंचे थे। यहां देर होने पर वे रात को यमुनोत्री स्थित यमुना आश्रम में ही ठहरे थे।
सोमवार की देर रात को धाम में आई आपदा से ये तीर्थयात्री काफी भयभीत हो गए। मंगलवार तड़के ही इन्होंने नीचे आने का फैसला किया। जानकीचट्टी पुलिस चौकी इंचार्ज सतवीर सिंह ने बताया कि राम मंदिर के पास पैदल रास्ता तबाह होने के कारण यह यात्री नीचे नहीं आ पा रहे थे।
एसडीआरएफ एवं पुलिस के विशन सिंह, हर्षवर्द्धन कंडारी, मोहन सिंह, गौतम, तरुण एवं दीपक आदि जवानों ने रेस्क्यू अभियान चलाकर इन यात्रियों समेत यमुनोत्री से लौटे दो दर्जन लोगों को सुरक्षित जानकीचट्टी तक पहुंचाया।
तटवर्ती हिस्सों में बनी करीब एक दर्जन कच्ची दुकानें तबाह हो गई
यमुनोत्री धाम में अतिवृष्टि से मची तबाही की सूचना मिलते ही डीएम डा. आशीष चौहान ने जिला मुख्यालय स्थित आपदा कंट्रोल रूम में संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि प्रशासन की पहली प्राथमिकता यमुनोत्री धाम तक रास्ता बहाल करने की है। उरेडा को यमुनोत्री पैदलमार्ग पर सोलर लाईटें लगाने के निर्देश दिए।
ऊर्जा निगम को जल्द से जल्द यमुनोत्री धाम तक विद्युत आपूर्ति बहाल करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित विभागों को युद्धस्तर पर कार्य कर जल्द से जल्द आपदा में क्षतिग्रस्त व्यवस्थाएं दुरुस्त करने को कहा है। इस मौके पर एसपी ददनपाल, लोनिवि के एसई अशोक कुमार, एडीएम पीएल शाह, प्रभारी अधिकारी अनुराग आर्य, ऊर्जा निगम के ईई गौरव सकलानी, आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल आदि मौजूद रहे। अधिकारियों के साथ बैठक करने के बाद डीएम संबंधित अधिकारियों को साथ लेकर तत्काल यमुनोत्री धाम के लिए रवाना हो गए।
उन्होंने जानकीचट्टी पहुंचकर हालात का जायजा लिया और अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी करने के साथ ही क्षेत्र की जनता से आपदा से उत्पन्न स्थितियों से निपटने में सहयोग की अपील की। यहां से राम मंदिर होते हुए वे क्षतिग्रस्त पैदल रास्ते वाले स्थान पर पहुंचे। यहां से आगे जाने का रास्ता तबाह होने के बावजूद डीएम पहाड़ी के रास्ते चढ़कर यमुनोत्री धाम गए हैं। समाचार लिखे जाने तक डीएम, एसपी एवं अन्य अधिकारी यमुनोत्री से लौटे नहीं हैं।
जिला मुख्यालय पर बैठकर ही यमुनोत्री धाम में सीसीटीवी कैमरों की मदद से नजर रखने का वीडियो मॉनीटरिंग सिस्टम भी ऐन मौके पर जवाब दे गया। सोमवार रात करीब डेढ़ बजे तक यमुनोत्री मंदिर के सामने लगे सीसीटीवी कैमरे से मौके का वीडियो इस सिस्टम पर रिकार्ड हुआ। जिसमें यमुनोत्री में मूसलाधार बारिश होती दिख रही है।
इस दौरान संभवत: यमुना से हुए कटाव के कारण यह कैमरा टूटकर गिर गया। इसके बाद की कोई घटना इस सिस्टम में रिकार्ड नहीं हुई। यमुनोत्री में लगे दूसरे कैमरे और रास्ते में लगे छह अन्य कैमरे भी विद्युत आपूर्ति ठप होने पर बंद पड़ गए। बता दें कि हाल ही में स्वच्छ आईकॉनिक प्लेस योजना के तहत प्रशासन ने यमुनोत्री धाम और पैदल रास्ते में करीब 72 लाख रुपये लागत से वीडियो मॉनीटरिंग सिस्टम लगाकर जिला मुख्यालय एवं बड़कोट में बैठकर ही धाम के हालात पर नजर रखने की व्यवस्था की थी।
यमुनोत्री धाम में तबाही की सूचना मिलते ही यमुनोत्री मंदिर समिति के उपाध्यक्ष जगमोहन उनियाल, सचिव कृतेश्वर उनियाल, पुरुषोत्तम उनियाल आदि तीर्थ पुरोहित मंगलवार तड़के ही यमुनोत्री पहुंचे। राम मंदिर वाले हिस्से में पैदल रास्ता तबाह होने पर वे खड़ी पहाड़ी से हाथों और घुटनों के बल चढ़कर आगे बढ़े। उन्होंने यमुनोत्री धाम में तबाही का जायजा लेकर प्रशासन को इसकी जानकारी दी और शीघ्र व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने की मांग की।