सरखेत में जहां पूरा मकान सैलाब की चपेट में आया उसमें बच्चा विशाल और उसके मामा सुरेंद्र घटना की रात सोने के लिए गए थे। मामा के साथ विशाल भी ताऊ के घर में गया था। जिससे विशाल के माता-पिता और बाकी सदस्य तो सुरक्षित बच गए, लेकिन सुरेंद्र व विशाल भी ताऊ के परिवार के तीन अन्य सदस्यों के साथ मलबे की चपेट में आ गए।
मंगलवार को भी विशाल के पिता रमेश सिंह और मां सुनीता देवी बचाव कार्यों को देखते रहे। सुनीता घर के आंगन में गुमसुम बैठकर बचाव दलों को एकटक निहार रही थी। उन्हें एक उम्मीद थी कि उनका भाई सुरेंद्र, बेटा विशाल और अन्य लापता लोग मिल जाएंगे।
गांव की दूसरी महिलाएं सुनीता को सांत्वना दे रही थी। वहीं, रमेश भी कभी पत्नी को दिलासा देने घर आते तो अधिकतर वक्त बचाव दलों के साथ बड़ी उम्मीद के साथ मौजूद रहे। रमेश के ममेरे भाई रणजीत सिंह ने बताया कि घटना वाले दिन घर में टिहरी जिले से करीबी रिश्तेदार आए हुए थे।
सुरेंद्र सिंह को रमेश के दूसरे भाई दिनेश ने रिश्तेदारी में रात को अपने घर बुला लिया था। विशाल भी अपने मामा सुरेंद्र सिंह के साथ ताऊ के घर सोने चला गया था। रमेश का घर कुछ दूरी पर ऊपर था, वहां मलबा नहीं आया।