फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आपदा का मलबा बना केदारनाथ की सुरक्षा ‘दीवार’

Tue, 23 Jun 2015 07:45 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
दो साल पहले जलप्रलय से केदारनाथ में जमा हुए मलबे को अब हटाने के पक्ष में भू-विज्ञानी नहीं है। उनका कहना है कि यदि मलबा हटाया गया तो यहां गड्ढा हो जाएगा और ऐसे में मंदाकिनी नदी से बाढ़ का खतरा पैदा होगा। गौरतलब है कि धाम में नरकंकाल मिलने के बाद यहां से मलबा हटाने पर सियासी गलियारे में बहस तेज हो जाती है।
विज्ञापन


जून 2013 की आपदा के बाद जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) ने सर्वेक्षण करके शासन को अगस्त 2014 में केदारनाथ का मलबा न हटाने के संबंध में रिपोर्ट भेजी थी। तब उस पर इतना ध्यान नहीं दिया गया। आपदा के दो साल पूरे होने के दिन ही 16 जून को दो और नरकंकाल मिलने के बाद नए सिरे से इस पर बहस शुरू हो गई।

पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ने फिर दोहराया कि मलबे में कंकाल के रूप में और कई शव दबे हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने मलबे पर विज्ञानियों से मशविरे की बात कही। कहा कि मलबा हटाने का कोई वैज्ञानिक तरीका नहीं मिल पाया है। विज्ञानियों के बीच भी इस पर नए सिरे से बात हुई।
विज्ञापन


जीएसआई के उप महानिदेशक (दून) रहे विज्ञानी टीएस पांगती का कहना है कि मलबे की वजह से केदारनाथ का ‘प्लेटफॉर्म’ ऊंचा हो गया है। अगर इसे हटाते हैं तो मंदाकिनी से बाढ़ का खतरा फिर बढ़ जाएगा। यह सुझाव भी दिया कि घरों में भरे मलबे को भी वहीं डाला जाए।

मकान तोड़े जाते हैं तो उनका मलबा भी कहीं और जगह न फेंका जाए। केदारनाथ में क्षतिग्रस्त सभी निजी भवनों को भी तोड़ा जाना है। कुछ तोड़े जा रहे हैं, कई बाकी हैं।
विज्ञापन

विज्ञानियों ने उठाए सवाल

- अगर मलबा हटा तो फेंका कहां जाएगा?
- नदी में डालने पर गाद बढ़ने की समस्या होगी, नदी अपना रास्ता बदल सकती है
- दो साल में मलबे का भू-दबाव से सामंजस्य बन गया है
- मलबा हटने पर एक तरफ भू दबाव अधिक बढ़ेगा

मलबे से केदारनाथ का ‘प्लेटफॉर्म’ ऊंचा हो गया है। इससे बाढ़ के पानी से बचत रहेगी। हटाने का कोई मामला नहीं है। यहां निर्माण कराना हो तो इसे और ‘सॉलिड’ हो जाने दें।
- प्रोफेसर अजय पॉल, वाडिया इंस्टीट्यूट भूगर्भ विज्ञान

दो साल पहले केदारनाथ में आपदा से जमा अस्थायी मलबा अब प्राकृतिक हिस्सा हो गया है। उसे हटाने की कोई जरूरत नहीं है। इसको समतल किया जा सकता है।
- प्रोफेसर एके सराफ, विभागाध्यक्ष भू विज्ञान, आईआईटी रुड़की
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें