उत्तराखंड में साढ़े तीन हजार प्राइमरी शिक्षकों के पदों पर 31 मार्च तक बीएड टीईटी पास युवाओं की नियुक्ति नहीं हुई तो यह पद तीन-चार वर्षों तक खाली पड़े रहेंगे।
उत्तराखंड में यह कोर्स नहीं कराया जाता
एनसीटीई के नियमों के मुताबिक 31 मार्च के बाद केवल डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजूकेशन (डीएलएड) धारी युवाओं को ही प्राइमरी शिक्षक बनने का मौका मिलेगा, लेकिन प्रदेश में फिलहाल किसी भी संस्थान में यह कोर्स नहीं कराया जाता।
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नेशनल काउंसिल फोर टीचर एजूकेशन (एनसीटीई) ने डायट की ओर से गए आवेदनों के अलावा 13 प्राइवेट संस्थानों के आवेदन भी वापस कर दिए हैं।
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प्रदेश सरकार की ओर से एनसीटीई को भेजे गए जवाब में कहा गया है कि प्रदेश में प्राइवेट या अशासकीय कॉलेजों में डीएलएड पाठ्यक्रम संचालित नहीं किया जा सकता। इस आधार पर आवेदन वापस कर दिए हैं।
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जबकि डायट को एनसीटीई मानक पूरे न करने का पत्र भेज चुकी है। बावजूद इसके किसी भी डायट ने अभी तक जवाब नहीं दिया है।
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ऐसे में इस साल प्रदेश में डीएलएड पाठ्यक्रम शुरू होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। यदि आगामी वर्ष से डायट में भी यह कोर्स शुरू होता है तो इसे पूरा करने में दो वर्ष का समय लगेगा।
फिर होगा पलायन
प्रदेश में डीएलएड शुरू नहीं हुआ तो युवाओं को यह कोर्स करने के लिए दूसरे प्रदेशों के चक्कर काटने पड़ेंगे।
एसोसिएशन आफ सेल्फ फाइनेंस इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष सुनील अग्रवाल ने बताया कि हरियाणा में 300 और यूपी में 500 से ज्यादा डीएलएड संस्थान चल रहे हैं। प्रदेश में सरकार का रुख सरासर गलत है। इस संबंध में वे जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे।