गांवों को इंटरनेट से जोड़ने की केंद्र के डिजिटल इंडिया प्रोग्राम को उत्तराखंड में झटका लगा है। प्रदेश में 1500 गांव ऐसे हैं जो कनेक्टिविटी से दूर हैं। इन गांवों के लोगों को मोबाइल फोन पर बात करने के लिए पांच से दस किलोमीटर दूर चलकर कवरेज एरिया में आना पड़ता है। यहां की तीन हजार ग्राम पंचायतों में थ्री जी और ब्राडबैंड की कनेक्टिविटी नहीं है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल डिजिटल इंडिया योजना का आगाज किया था। इस योजना के तहत देश के सभी ग्राम पंचायतों को इंटरनेट से जोड़ना है ताकि लोग ई-गवर्नेंस की सुविधा का लाभ उठा सकें। लेकिन, केंद्र सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना उत्तराखंड में ठहर सी गई है। शहरी और मैदानी इलाकों में तो कोई समस्या नहीं है, लेकिन पर्वतीय जनपदों में कनेक्टिविटी की समस्या आड़े आ रही है। यहां के 1500 गांव ऐसे हैं जहां मोबाइल फोन की कनेक्टिविटी ही नहीं है।
आंकड़ों पर गौर करें तो 7950 ग्राम पंचायतों में से 3000 में थ्री जी और ब्राडबैंड की कनेक्टिविटी नहीं है। ऐसे में इन ग्राम पंचायतों में कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) की सुविधा शुरू नहीं हो पाई है। जबकि लक्ष्य मार्च 2017 तक सभी ग्राम पंचायतों में सीएससी की सुविधा उपलब्ध कराने की है। हालांकि, प्रदेश की 7950 ग्राम पंचायतों में से 3804 में सीएससी की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। शेष 4146 ग्राम पंचायतों से 1194 में थ्रीजी और ब्राडबैंड की सुविधा उपलब्ध है, जहां सीएससी शुरू किए जाने की कवायद चल रही है।
मुख्यमंत्री भी उठा चुके हैं समस्या
ग्राम पंचायतों में थ्रीजी और ब्राडबैंड की कनेक्टिविटी नहीं होने की समस्या मुख्यमंत्री भी उठा चुके हैं। उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद को पत्र भेजकर इन तीन हजार ग्राम पंचायतों को वी-सेट के माध्यम से कनेक्टिविटी प्रदान करने का सुझाव दिया है। ताकि प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में मार्च 2017 तक सीएससी की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
हरिद्वार और उधमसिंह नगर को छोड़कर अन्य सभी जनपदों के कई गांवों में कनेक्टिविटी की समस्या है। पूरे प्रदेश में 1500 ऐसे गांव हैं जहां मोबाइल फोन नहीं चलते हैं। तीन हजार ग्राम पंचायतों में थ्रीजी और ब्राडबैंड की कनेक्टिविटी नहीं है। इस समस्या से केंद्र सरकार को अवगत कराया जा चुका है।
- दीपक कुमार, सचिव आईटी