डिजिटल इंडिया के दौर में उत्तराखंड की आईटी विभाग के सर्वर ऑफलाइन पड़े हैं।
वर्ष 2007-08 में कई महकमों आईटी महकमे ने करोड़ों की लागत से बच्चों को ऑनलाइन विज्ञान और गणित पढ़ाने, स्मार्ट कार्ड से लेकर सरकारी महकमों के मानव संसाधन प्रबंधन के लिए बनी एप्लिकेशन तैयार की, लेकिन सरकारी अनदेखी के चलते अब डाटा सर्वर बंद पड़े हैं।
चार वर्ष पहले नोएडा में स्थापित सर्वर उखाड़कर सर्वर दून में स्थापित करने के लिए लाए, लेकिन तब से स्टोर में धूल फांक रहे हैं। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने अपनी आईटीडीए संस्था के माध्यम से वर्ष 2007 में कई विभागों के लिए पोर्टल तैयार किया।
सरकारी विभागों मानव संसाधन प्रबंधन की व्यवस्था की गई जिसमें एमडीडीए, पुलिस आदि विभागों के लिए एप्लिकेशन तैयार की गई। इसका उद्देश्य कर्मियों की तैनाती, उपस्थिति और रिक्त पदों का पता लगाया जा सकता था। सरकारी स्कूलों के लिए ऑनलाइन विज्ञान और गणित तक के विषय पढ़ाने के लिए विशेष प्रोग्राम के साथ टीचर स्टूडेंट वेब पोर्टल बनाया।
लोक निर्माण विभाग के लिए बनाए प्रोग्राम में कौन से निर्माण कार्य चल रहा है, किस स्तर पर है यह तक प्रावधान था। डिजिटल लाइब्रेरी, चारधाम, समाज कल्याण विभाग की योजनाओं के लिए पोर्टल तक उस दौरान बनाए गए। इतना ही नहीं कई आईटी कंपनियों से महकमे ने एमओयू किए, लेकिन व्यवस्था 2011 में ठप हो गई।
आईटीडीए ने सभी पोर्टल के लिए सीडेक नोएडा में 90 लाख के किराए पर सर्वर स्थापित करने के लिए जगह ली थी। विभागों के एप्लिकेशन का इस्तेमाल नहीं करने से सर्वर बंद कर दिए गए। यह सर्वर उसके बाद एफआरआई में स्थापित करने की प्रक्रिया चली, लेकिन वह भी ठंडे बस्ते में चली गई। अब यह सर्वर आईटीडीए के स्टोर में रखे धूल फांक रहे हैं।
आईटी सचिव दीपक कुमार ने बताया कि डाटा सर्वर लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हो पाए, जिससे एप्लिकेशन्स का संचालन प्रभावित रहा। अब उनको आईटी पार्क में बने आईटी भवन के डाटा सेंटर में स्थापित किया जाएगा।
सर्वर बिना ठप पड़े पोर्टल
- 12 विभागों के लिए मानव संसाधन प्रबंधन की एप्लिकेशन
- लोक निर्माण विभाग की प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एप्लिकेशन
- सेंट्रल डाटा वॉल्ट
- बिरला के साथ डिजिटल लाइब्रेरी
- टीचर स्टूडेंट पोर्टल
- समाज कल्याण विभाग का पोर्टल
- कृषि का पोर्टल