16 दिसंबर को कोटद्वार से हुई पहली ट्रांजेक्शन
वरिष्ठ प्राध्यापिका ने पहली बार 16 दिसंबर को अपने इंडियन बैंक खाते से 37 लाख रुपये कथित जांच अधिकारी द्वारा बताए गए अकाउंट में ट्रांसफर किए। इसके बाद भी उनके द्वारा व्हाट्सएप पर कॉल कर लगातार धमकियां दी जाती रहीं और कॉल डिस्कनेक्ट नहीं करने की चेतावनी दी गई।
18 सितंबर को इलाहाबाद से हुई दूसरी ट्रांजेक्शन
पैसा खत्म होने पर वरिष्ठ प्राध्यापिका इलाहाबाद पहुंचीं। वहां उन्होंने अपने अकाउंट से फिक्स्ड डिपॉजिट और पॉलिसी मेच्योरिटी का पैसा, जोकि 30 लाख से अधिक था, कथक जांच अधिकारी के खाते में ट्रांसफर कर दिए।
19 दिसंबर को हुई तीसरी ट्रांजेक्शन
सेवानिवृत्त बड़ी बहन को जानकारी न देकर उनकी जमा पूंजी करीब 40 लाख रुपये भी साइबर ठग को ट्रांसफर कर दिए।
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अरेस्ट वारंट कैंसिलेशन के नाम पर मांग रहे 64 लाख रुपये
ठगी की शिकार वरिष्ठ प्राध्यापिका ने बताया कि साइबर ठग अब भी लगातार उनसे व्हाट्सएप कॉल पर संपर्क बनाए हुए हैं और कैंसिलेशन आफ अरेस्ट वारंट के नाम पर 64 लाख रुपये मांगे जा रहे हैं।