फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Dehradun: 30 साल के प्रयास के बाद भी नहीं मिले तो अब क्या मिलेंगे, रजिस्टर से काटे 33 फरार आरोपियों के नाम

Wed, 26 Feb 2025 11:06 AM IST
देहरादून ब्यूरो माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून

सार

बड़े अपराधों में शामिल आरोपियों को तलाशने के लिए लगातार विशेष टीमें और एसटीएफ कोशिश करती रहती है। मगर, छोटे अपराधों में शामिल अपराधी जब नहीं मिलते तो उनका नियमानुसार 30 साल के बाद रजिस्टर से नाम काटने की व्यवस्था है।
विज्ञापन
एसएसपी अजय सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

तीन दशकों के अथक प्रयासों के बाद भी 33 फरार आरोपी ढूंढे नहीं मिले। अब इनके मिलने की संभावना खत्म हो गई। लिहाजा, इन आरोपियों के नाम मफरूर (फरार) रजिस्टर से काट दिए गए हैं। समय-समय पर पुलिस इस कार्रवाई को अमल में लाती है। इस बार इसमें 33 नामों को खारिज किया गया है।

विज्ञापन


एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि किसी भी अपराध में पकड़े न जाने के बाद न्यायालय से आरोपियों को फरार घोषित किया जाता है। पुलिस भी इनका एक रजिस्टर बनाकर समय-समय पर इनकी धरपकड़ के लिए अभियान चलाती है। बड़े अपराधों में शामिल आरोपियों को तलाशने के लिए लगातार विशेष टीमें और एसटीएफ कोशिश करती रहती है। मगर, छोटे अपराधों में शामिल अपराधी जब नहीं मिलते तो उनका नियमानुसार 30 साल के बाद रजिस्टर से नाम काटने की व्यवस्था है।

Iजिनके नाम काटे गए हैं, इन सभी आरोपियों की लगातार तलाश की जा रही थी, लेकिन इनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। इनके नाम-पता की तस्दीक ही नहीं हो पाई। ऐसे में पुलिस रेगुलेशन में निहित प्रावधानों के तहत जिले के पुलिस कप्तान को अधिकार है कि वह ऐसे फरार आरोपियों के नाम रजिस्टर से काट सकते हैं।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें...Maha Shivratri 2025: शिव के रंग में रंगी देवभूमि, जयकारों से गूंजे शिवालय, बाहर लगी श्रद्धालुओं की लंबी कतार
विज्ञापन


एसएसपी ने बताया कि इन्हीं के आधार पर ये नाम काटे गए हैं। इनमें सिर्फ छोटे अपराधों में शामिल आरोपियों के नाम हैं। इनमें किसी का पता नहीं मिला तो किसी का नाम गलत था। किसी की मृत्यु हो चुकी थी, तो किसी के बारे में कोई जानकारी ही नहीं मिली।I

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें