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नहीं मिला ‘आयुष्मान’, आठ मरीजों के ऑपरेशन टाले

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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देहरादून। आयुष्मान योजना के तहत सामान न मिलने पर डॉक्टरों ने हड्डी मरीजों के ऑपरेशन से हाथ खड़े कर दिए। शुक्रवार को ऐसे आठ मरीजों के ऑपरेशन टाल दिए गए। कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष सयाना ने अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों और आर्थो विभाग से मामले का ब्यौरा तलब किया है। साथ ही संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी।
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केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी अटल आयुष्मान योजना को लेकर सरकारी अस्पतालों में भी व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो रही है। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल दून मेडिकल अस्पताल में भी व्यवस्था धड़ाम नजर आ रही है। इस अव्यवस्था की वजह से अस्पताल में कई जरूरतमंद मरीजों को आयुष्मान योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। ताजा उदाहरण शुक्रवार को सामने आया। जब अटल आयुष्मान योजना के तहत आने वाले मरीजों को लगने वाले इम्प्लांट और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध नहीं हो पाए। इस पर डॉक्टरों ने ऑपरेशन करने से हाथ खींच लिए। पता लगा है कि ऑपरेशन के बाद लगने वाली प्लेट की क्वालिटी को लेकर भी डॉक्टरों ने सवाल उठाए हैं। समय दिए जाने के बावजूद ऑपरेशन न होने से मरीजों और उनके परिजनों को दिक्कत का सामना करना पड़ा। कुछ परिजनों व मरीजों ने इसकी शिकायत चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा और उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एनएस खत्री से की। मामला मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष सयाना तक भी पहुंचा। इससे अस्पताल से लेकर कॉलेज प्रशासन तक में अफरातफरी की स्थिति रही। बहरहाल, इससे आयुष्मान योजना को लेकर मेडिकल कॉलेज व अस्पताल प्रशासन की पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लग रहे हैं।
पूरे मामले में अस्पताल प्रशासन और आर्थो विभाग की पूरी टीम को तलब किया है। पता लगा है कि इम्प्लांट और अन्य जरूरी सामान सही समय पर नहीं आ पाए थे। प्रथमदृष्ट्या विभिन्न स्तर पर समन्वय की कमी सामने आई है। शनिवार को व्यवस्था ठीक हो जाएगी। प्लेट की क्वालिटी को लेकर उठे सवालों की भी जांच होगी। शनिवार को अस्पताल में सभी संबंधित की बैठक ली जाएगी। अव्यवस्था के लिए जो भी जिम्मेदार होगा, कार्रवाई की जाएगी।
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डॉ आशुतोष सयाना, प्रिंसिपल दून मेडिकल कॉलेज
..तो शिकायत के बाद उठाया डॉक्टरों ने यह कदम
कुछ दिन पहले आर्थो विभाग के डॉक्टरों ने आयुष्मान योजना के तहत इलाज करा रहे एक मरीज से बाजार से सामान व दवा मंगा ली थी। मामला मीडिया में आने पर आर्थो विभाग की किरकिरी भी हुई थी। सूत्रों का कहना है कि इसी प्रकरण को देखते हुए डॉक्टरों ने सामान उपलब्ध होने तक ऑपरेशन न करने का कदम उठाया।
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