पहाड़ों से डायबिटीज हार गई है। पर्वतीय क्षेत्रों में डायबिटीज के रोगी बहुत कम हैं लेकिन घाटी में रोगी तेजी से बढ़ रहे हैं। इंडोक्राइन सोसाइटी आफ इंडिया के उत्तराखंड कार्यकारी सदस्य डा. राजीव त्यागी ने बताया कि इसका मुख्य कारण आरामतलबी है। लोग हाई कैलोरी खाना लेते हैं और शारीरिक श्रम कम करते हैं।
राज्य में मरीजों की संख्या दोगुनी
वर्ल्ड डायबिटीज डे की पूर्व संध्या पर डा. राजीव त्यागी ने पत्रकारों को बताया कि राज्य बनने के बाद 13 सालों में उत्तराखंड में डायबिटीज के मरीजों की संख्या दोगुना हो गई है। लेकिन यह राष्ट्रीय प्रतिशत से अभी भी बहुत कम है। राष्ट्रीय आंकड़ा 12 फीसदी का है। खतरनाक यह है कि रोगियों का आयु वर्ग घट रहा है। पहले डायबिटीज 50 साल की उम्र के बाद होती थी और अब 25 साल और इससे कम उम्र के युवकों को यह रोग हो रहा है।
आरमतलबी बन रही कारण
उन्होंने बताया कि जब उत्तराखंड राज्य बना था तो यहां डायबिटीज का आंकड़ा 3.5 फीसदी आबादी का था। पर्वतीय क्षेत्रों में लो कैलोरी फूड के साथ लोग शारीरिक श्रम बहुत करते हैं। इससे पहाड़ों पर अधिकांश आबादी डायबिटीज से सुरक्षित है। अधिक विकास घाटी में हुआ। संपन्नता बढ़ने से लोगों में आरामतलबी आती है जो डायबिटीज का कारण बन रही है। प्रदेश में महिलाओं की तुलना में पुरुष डायबिटीज की गिरफ्त में अधिक हैं।
टाइप-1 डायबिटीज
डायबिटीज का यह प्रकार बच्चों में होता है। इसका मुख्य कारण जेनेटिक है। जीन की गड़बड़ी से बच्चों में पैदाइशी डायबिटीज हो जाती है। इससे बचाव के लिए बच्चों को शुरु इंसुलिन देनी पड़ती है।
टाइप-2 डायबिटीज
.डायबिटीज का यह प्रकार बड़ों को होता है। इसमें अग्नाशय की बीटा कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे इंसुलिन कम बनती है और ब्लडशुगर हाई हो जाती है। यह पैदाइशी नहीं होती। इससे बचा जा सकता है।
कारण
मोटापा, तनाव, कम सोना, वायरल संक्रमण, चिकनाईयुक्त तली-भुनी चीजों का अधिक सेवन, जंक फूड वगैरह
यह हैं मुख्य लक्षण
अधिक भूख लगेरात में बार-बार पेशाब लगेअचानक वजन कम होने लगेचक्कर सा आए
रोकने के सरल उपाय
शरीर का वजन स्वस्थ सीमा में बनाए रखेंयोग-प्राणायाम, नियमित कसरत करेंसुबह तेज चाल के साथ टहलेंसब्जियां और मौसमी फल अधिक खाएंचीनी और तली-भुनी चीजों का नियंत्रित उपभोग करेंधुम्रपान और शराब से बचें
यह होता है डायबिटीज में
हृदय की रक्त नलिकाओं में खराबीआंखों के परदों में खराबीगुर्दों और तंत्रिकाओं पर प्रतिकूल प्रभावनपुंसकता