विकासनगर। आर्य समाज मंदिर विकासनगर का 125वां वार्षिकोत्सव धूमधाम के साथ शुरू हो गया। वार्षिकोत्सव के दूसरे दिन मंगलवार की सुबह मंदिर परिसर में हवन आहुत किया गया। जिसमें लोगों ने आहुति डाल कर विश्व कल्याण की कामना की।
महात्मा चैतन्य मुनि और माता सत्यप्रिया यति ने वेदों की महत्वता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राष्ट्र का विकास वेद मार्ग पर चलकर ही संभव है। आध्यात्मिक मार्ग से लौकिक जीवन भी श्रेष्ठ और सुखी बनता है। संसार को यदि श्रेष्ठ बनाना है तो पहले स्वयं को श्रेष्ठ बनाना होगा। जिसकी शुरूआत आध्यात्मिक पक्ष से ही होती है। मनुष्य को पहले अपनी आत्मिक उन्नति करनी चाहिए तभी वह सही मार्ग पर चलकर सामाजिक उन्नति कर सकता है। वेद का प्रथम संदेश ही मुर्नभव है। जिसका अर्थ पहले मनुष्य बनो है। पाखंडी लोगों के कारण समाज में कुरीतियां बढ़ रही है। मत, धर्म, संप्रदाय से समाज की होनी होती है।
कलकत्ता से पधारे भजनोपदेश संगीताचार्य पं. कैलाश चंद्र कर्मठ ने भजनों की सुरमयी प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने बावरे मनवा क्यों ना प्रभु की याद आती है, प्रभु तेरा ही साथी है, उम्र गुजर गई पल-पल में, झूठ, कपट और अल-छल में, सेवा, सुश्रुया करके ही बड़े-गुरुजनों, पूर्वजों के प्रति सच्ची श्रद्धा ही श्राद्ध है आइए भजनों की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर चंदन शास्त्री, नरेंद्र वर्मा, सुरेंद्र सैनी, रमण डंग, जीतू शर्मा, हरिकिशोर महेंद्रू, योगेश्वर, सुबोध, ज्ञानेंद्र, डॉ. प्रवेश गुप्ता, दीपक बंसल, डॉ. नरदेव, ब्रजमोहन, योगेंद्र, दिनेश, विजय, राजकुमार, अनुजा, विमला, सोनिका, अनिता, रश्मि, मिथलेश, अनिता, मीनू, प्रेम महावर, दिव्या, डॉ. सोनाक्षी, रेखा, नंदिनी आदि मौजूद रहे।