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देवस्थानम बोर्ड पर बोले सीएम त्रिवेंद्र, धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं से छेड़छाड़ मकसद नहीं, जल्द नामित होंगे सदस्य

Wed, 22 Jul 2020 12:12 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • बोले, यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बनाया देवस्थानम बोर्ड
  • कहा, राज्य गठन के 19 साल बाद सबसे बड़ा सुधारात्मक निर्णय है देवस्थानम बोर्ड का गठन
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि देश दुनिया में धार्मिक व सांस्कृतिक परंपराओं का विशेष महत्व है। इन परंपराओं के साथ छेड़छाड़ करना सरकार का मकसद नहीं है। भविष्य की जरूरतों, यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सरकार ने देवस्थानम बोर्ड का गठन किया है। राज्य गठन के 19 साल के बाद यह सबसे बड़ा सुधारात्मक निर्णय है।

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मंगलवार को सीएम आवास में प्रेसवार्ता में मुख्यमंत्री ने देवस्थानम बोर्ड पर हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया। कहा, बोर्ड का गठन करने के पीछे सरकार की जो इच्छा और भावना थी, उस पर न्यायालय ने मुहर लगाई है। बोर्ड बनने से आने वाले समय में चारधामों पर आने वाले यात्रियों की सुरक्षा और बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी। सीएम ने कहा कि पंडा और तीर्थ पुरोहितों ने प्रदेश की परंपराओं का संरक्षण किया है। पंडा समाज और तीर्थ पुरोहितों के हकहकूकों को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। सरकार उनके हितों को और सुरक्षित करेगी। इसके लिए यदि एक्ट में भी संशोधन करना पड़ा तो इस पर विचार किया जाएगा।

न्यायालय के फैसले को हार-जीत के रूप में न देखें
मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायालय के फैसले को किसी की जीत हार से जोड़ कर नहीं देखना चाहिए। यह राजनीति का विषय नहीं है। सरकार और न्यायालय का निर्णय एक जैसा है। राजनीतिक कारणों से कोई बोर्ड का विरोध करता है तो यह उसकी सोच है। हमारे सामने राजनीति नहीं है, बल्कि पंडा पुरोहितों की चिंता है।
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पूर्व सीएम एनडी तिवारी भी चाहते थे यही व्यवस्था
सीएम ने कहा कि वर्ष 2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व.नारायण दत्त तिवारी भी बोर्ड बनाना चाहते थे। किन्हीं कारणों से वे नहीं कर पाए। बोर्ड की जगह चारधाम विकास परिषद बनाया। राज्य गठन के 19 साल के बाद कैबिनेट ने देवस्थानम बोर्ड के गठन का फैसला लिया है।

चारधाम देवस्थानम बोर्ड का जल्द होगा विस्तार, नामित होंगे सदस्य

उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड पर हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद सरकार जल्द ही बोर्ड का विस्तार करेगी। बोर्ड की व्यवस्था के अनुसार सदस्यों को नामित किया जाएगा। बोर्ड में पंडा समाज के सदस्यों की संख्या तीन से बढ़ाकर पांच करने की तैयारी चल रही है। इससे चारों धामों के पंडा समाज को बोर्ड में सदस्य के रूप में प्रतिनिधित्व मिल सकेगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत चारधाम देवस्थानम बोर्ड के अध्यक्ष हैं। वहीं, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज उपाध्यक्ष, बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रविनाथ रमन सदस्य सचिव हैं। इसके अलावा बदरीनाथ और गंगोत्री के विधायक, मुख्य सचिव, सचिव वित्त, सचिव पर्यटन सदस्य हैं। अभी तक सरकार ने बोर्ड में आठ सदस्यों को नामित किया है।

अब न्यायालय का फैसला आने के बाद सरकार जल्द ही बोर्ड का विस्तार करेगी। मंगलवार को प्रेसवार्ता में एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि शीघ्र ही बोर्ड का विस्तार कर अन्य सदस्यों को नामित किया जाएगा। माना जा रहा है कि बोर्ड में पंडा समाज से पांच सदस्य नामित करने से बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री धाम के पंडा समाज को बोर्ड में प्रतिनिधित्व मिल जाएगा।

ये सदस्य होंगे नामित
देवस्थानम बोर्ड में टिहरी महाराजा के परिवार से एक सदस्य, एक जानकार विशेषज्ञ, दो सांसद और छह विधायकों को नामित करने की व्यवस्था होगी। बोर्ड में सदस्यों को नामित करने के लिए सरकार एक्ट में कुछ संशोधन कर सकती है।

गंगोत्री व यमुनोत्री धाम में बनेगी व्यवस्था
देवस्थानम बोर्ड के गठन के बाद मंदिर की संपत्ति और दान पात्र के लेखा जोखा को लेकर बोर्ड को मंदिर कमेटी की ओर से सहयोग नहीं मिल रहा था। मामला न्यायालय में होने के कारण बोर्ड की तरफ से सख्ती नहीं गई है। अब न्यायालय का फैसला आने के बाद गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में बोर्ड की व्यवस्थाओं में तेजी आएगी।

चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत भी सुप्रीम कोर्ट में करेगी अपील

चार धाम तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारी महापंचायत ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देनेे का निर्णय लिया है। महापंचायत का कहना है कि पहले हाईकोर्ट के फैसले का अध्ययन किया जाएगा और इसके बाद सभी प्रभावित 51 मंदिरों से जुड़ी समितियों की बैठक बुलाई जाएगी। अध्यक्ष कृष्णकांत कोटियाल ने कहा कि तीर्थ पुरोहितों के लिए अभी सुप्रीम कोर्ट की राह खुली हुई है।

भाजपा के राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का इरादा जता चुके हैं। तीर्थ पुरोहित भी सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे। इसके साथ ही महापंचायत ने आंदोलन तेज करने का फैसला लिया है। कोटियाल के मुताबिक महापंचायत अपने स्तर पर सभी संतों से बात करेगी। कांग्रेस और उत्तराखंड क्रांति दल ने अभी तक तीर्थ पुरोहितों का साथ दिया है। महापंचायत इनसे दोबारा आग्रह करेगी।

तीर्थ पुरोहित पीछे हटने वाले नहीं हैं। यह आंदोलन अब और तेज किया जाएगा। इस बीच जिस तरह से देवस्थानम बोर्ड की कार्यप्रणाली रही है, उससे तीर्थ पुरोहितों का संदेह और बढ़ा है। देवस्थानम बोर्ड के जरिये हकहकूूकों को दरकिनार करने की कोशिश हो रही है, हालांकि दावा यही किया जा रहा है कि अधिकारों को नहीं छेड़ा जाएगा।
-कृष्णकांत कोटियाल, अध्यक्ष, चार धाम तीर्थ पुरोहित हकहकूकधारी महापंचायत
 

तीर्थ यात्रियों के लिए चारधाम यात्रा सुगम और सरल बनाएंगे : महाराज

पर्यटन एवं धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज ने देवस्थानम बोर्ड मामले में न्यायालय के फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि बोर्ड को लेकर दुविधा समाप्त हो गई है। हाईकोर्ट के फैसले से सांसद सुब्रमण्यम स्वामी को भी जवाब मिल गया है। बोर्ड पर न्यायालय की मुहर लगने से तीर्थ यात्रियों के लिए चारधाम यात्रा को सुगम और सरल बनाया जाएगा। यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए चारधाम को विकसित किया जाएगा।

महाराज ने कहा कि देवस्थानम बोर्ड का गठन चारधाम यात्रा के बेहतर संचालन और ऐतिहासिक मंदिरों के उत्थान के लिए किया गया है। बोर्ड की गतिविधियों में और अधिक गतिशीलता आने से सनातन संस्कृति के संरक्षण और राज्य के विकास में तेजी आएगी। कहा कि देवस्थानम बोर्ड को लेकर न्यायालय के फैसले का इंतजार था। बोर्ड के पक्ष में आए फैसले का स्वागत करते हैं। अब चारों धामों की व्यवस्था को और अधिक बेहतर बनाया जा सकेगा। कोरोना महामारी को लेकर धीरे-धीरे हालात सामान्य होने पर चारधाम यात्रा बाहरी राज्यों के लोगों के लिए शुरू की जाएगी।

सत्ता में आते ही निरस्त करेंगे देवस्थानम बोर्ड : प्रीतम सिंह

कांग्रेस के सत्ता में आते ही देवस्थानम बोर्ड को रद्द किया जाएगा। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह का यह कहना है। प्रीतम के मुताबिक कांग्रेस ने बोर्ड के गठन के समय ही कहा था कि पार्टी के प्रदेश की सत्ता मेें आते ही सबसे पहले इस बोर्ड को रद्द किया जाएगा।

पार्टी का मानना है कि प्रदेश सरकार ने बोर्ड का गठन करने में तीर्थ पुरोहितों सहित अन्य संबंधित पक्षों को विश्वास में नहीं लिया। ऐसे में सरकार की नीयत पर सवाल उठे थे। यही वजह रही कि कांग्रेस खुलकर तीर्थ पुरोहितों के पक्ष में खड़ी हुई।

यहां तक की तीर्थ पुरोहितों के आंदोलन में भी शामिल हुई। हाईकोर्ट से याचिका निरस्त हो जाने से कांग्रेस पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। कांग्रेस ने इस मामले में कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाया था।
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देवस्थानम बोर्ड कब क्या हुआ

10 दिसंबर 2019 : देवस्थानम बोर्ड अधिनियम विधानसभा में पारित किया गया।
15 जनवरी : राजभवन से अनुमति मिलने के बाद प्रदेश सरकार ने देवस्थानम बोर्ड का गठन किया।
22 मई : मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने देवस्थानम बोर्ड की पहली बैठक की अध्यक्षता की। बोर्ड को 10 करोड़ रुपये जारी किए गए।
29 जून : हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने भाजपा के राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी सहित अन्य याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की।
06 जुलाई : हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी की और फैसला सुरक्षित रखा।
21 जुलाई : हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया।

उच्च न्यायालय के निर्णय का हृदय से स्वागत करते हैं। कुछ लोगों को अटपटा लग रहा होगा। देवस्थापन बोर्ड की स्थापना के पीछे यही मंशा है कि देश विदेश के पर्यटकों को सुख सुविधा मिले। हमने पुजारियों, पंडों पुरोहितों के हितों को सुरक्षित रखा गया है। एक-एक व्यक्ति से बातचीत नहीं की जा सकती। जो उनके प्रतिनिधि हैं, उनसे वार्ता हुई है। किसी को दिक्कत है, तो बातचीत कर सकते हैं। ऐसा लगता है कि संशोधन करना है तो किया जा सकता है।
-बंशीधर भगत, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा
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