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देव पालकियां बदलेंगी सिमोग मंदिर का सदियों का इतिहास

Thu, 30 Jun 2016 10:29 AM IST
मनीष त्रिपाठी-सूपा सिंह बिष्ट/ अमर उजाला, विकासनगर
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simog temple
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जौनसार बावर में सामाजिक बदलाव की बयार बहने लगी है। सोमवार को देव पालकी के कालसी तहसील के दलित गांव चामड़ी में प्रवेश के बाद अब 10 जुलाई को सिमोग स्थित मंदिर से शिलगुर, विजट और चुड़ू महाराजा की पालकी एक दिन के प्रवास पर कालसी के ही एक अन्य दलित गांव सराड़ी जाएगी।
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इसको लेकर सराड़ी गांव के दलितों में भारी उत्साह है और वे बेसब्री से देवता का इंतजार कर रह हैं। मंदिर के चार सदी के इतिहास में पहला मौका है, जब यहां की देव पालकियां किसी दलित गांव में प्रवास करेंगी। 17 वीं सदी में बने सिमोग में मंदिर के प्रति जौनसार बावर के साथ ही हिमाचल के कई गांवों के लोगों की अटूट आस्था है।

प्राचीन शैली में निर्मित इस मंदिर की छटा दूर से ही देखते बनती है। आज तक यहां स्थापित देवताओं की पालकियों ने किसी दलित गांव में प्रवेश नहीं किया। लेकिन अब ग्राम प्रधान मकतूला देवी के ससुर माधोराम के आमंत्रण पर देव पालकी गांव आने को राजी हो गई है। माधोराम ने एक दशक पूर्व देवता से मन्नत मांगी थी, जो अब पूरी हो गई है।
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इसके बाद उन्होंने देव पालकियों को अपने घर आमंत्रित किया है। ग्राम प्रधान मकतूला देवी का कहना है कि देव पालकियों के प्रवेश को लेकर ग्रामीणों में उत्साह है। गांव में 60 दलित परिवार रहते हैं। पुजारी परम दत्त शर्मा ने कहा कि क्षेत्र में कोई भेदभाव नहीं है। देवता की इच्छानुसार ही देव पालकी को सराड़ी गांव ले जाया जा रहा है।
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मंदिर में दलितों के प्रवेश पर काफी विवाद हुआ था

- फोटो : file photo
उल्लेखनीय है कि बीते दिनों पोखरी गांव स्थित मंदिर में दलितों के प्रवेश पर काफी विवाद हुआ था। उग्र भीड़ ने राज्यसभा सांसद तरुण विजय और आराधना ग्रामीण विकास केंद्र समिति के संरक्षक दौलत कुंवर पर हमला कर दिया था। इससे पूर्व गबेला और लक्सियार में भी दलितों को मंदिर में प्रवेश को लेकर विवाद खड़ा हो गया था।

इन सभी घटनाओं से जौनसार बावर क्षेत्र की छवि धूमिल होने लगी थी। लेकिन अब दलितों के गांव में देव पालकी जाने की नई पहल से यहां सामाजिक बदलाव की तस्वीर भी नजर आने लगी है। 

राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा जा चुका है गांव
कालसी तहसील का सराड़ी गांव वर्ष 2014 में सुर्खियों में आया, जब गांव की महिला प्रधान मकतूला देवी को मनरेगा के तहत किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया। उन्हें केंद्रीय ग्राम्य विकास मंत्री चौधरी विरेंद्र सिंह ने सम्मानित किया।

Published By : Nirmala Suyal
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