जौनसार बावर में सामाजिक बदलाव की बयार बहने लगी है। सोमवार को देव पालकी के कालसी तहसील के दलित गांव चामड़ी में प्रवेश के बाद अब 10 जुलाई को सिमोग स्थित मंदिर से शिलगुर, विजट और चुड़ू महाराजा की पालकी एक दिन के प्रवास पर कालसी के ही एक अन्य दलित गांव सराड़ी जाएगी।
इसको लेकर सराड़ी गांव के दलितों में भारी उत्साह है और वे बेसब्री से देवता का इंतजार कर रह हैं। मंदिर के चार सदी के इतिहास में पहला मौका है, जब यहां की देव पालकियां किसी दलित गांव में प्रवास करेंगी। 17 वीं सदी में बने सिमोग में मंदिर के प्रति जौनसार बावर के साथ ही हिमाचल के कई गांवों के लोगों की अटूट आस्था है।
प्राचीन शैली में निर्मित इस मंदिर की छटा दूर से ही देखते बनती है। आज तक यहां स्थापित देवताओं की पालकियों ने किसी दलित गांव में प्रवेश नहीं किया। लेकिन अब ग्राम प्रधान मकतूला देवी के ससुर माधोराम के आमंत्रण पर देव पालकी गांव आने को राजी हो गई है। माधोराम ने एक दशक पूर्व देवता से मन्नत मांगी थी, जो अब पूरी हो गई है।
इसके बाद उन्होंने देव पालकियों को अपने घर आमंत्रित किया है। ग्राम प्रधान मकतूला देवी का कहना है कि देव पालकियों के प्रवेश को लेकर ग्रामीणों में उत्साह है। गांव में 60 दलित परिवार रहते हैं। पुजारी परम दत्त शर्मा ने कहा कि क्षेत्र में कोई भेदभाव नहीं है। देवता की इच्छानुसार ही देव पालकी को सराड़ी गांव ले जाया जा रहा है।