आदेश में कहा गया है कि राज्य परियोजना कार्यालय स्तर से उपलब्ध कराई गई पुस्तकों की सूची में से ही पुस्तकें खरीदी जाएंगी। यदि किसी भी स्कूल ने इसके अलावा पुस्तकें खरीदी तो शिकायत पर संबंधित के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। इसके अलावा 20 फीसदी धनराशि से क्षेत्रीय भाषा एवं साहित्य से संबंधित पुस्तकें खरीदी जानी हैं।
आदेश में यह भी कहा गया है कि पुस्तकें किसी भी स्थिति में तय मूल्य से अधिक पर नहीं खरीदी जाएगी। पुस्तकें वित्तीय वर्ष 2021-22 में खरीदे जाने के लिए तत्काल कार्यवाही की जाए। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि केंद्र से पुस्तकालय के लिए देरी से पैसा मिलने की वजह से इसके लिए मिली धनराशि जारी करने में देरी हुई है।
इतने स्कूलों के लिए इतनी धनराशि हुई जारी
प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों को पांच हजार, जूनियर को 13 हजार, हाईस्कूल को 15 हजार एवं इंटर कालेजों को 20 हजार रुपये पुस्तकालयों में पुस्तकें खरीदने के लिए जारी की गई है।
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स्कूलों में सुविधाएं नहीं फिर भी पैसा खर्च नहीं
प्रदेश के 139 माध्यमिक विद्यालयों में पेयजल और 80 हजार से अधिक बच्चों के लिए फर्नीचर नहीं है। जबकि बेसिक और माध्यमिक के कुछ स्कूल भवन जर्जर बने हैं, लेकिन वित्तीय वर्ष समाप्ति पर है, इसके बावजूद इन स्कूलों के लिए मिली शत प्रतिशत धनराशि को अब तक खर्च नहीं किया जा सका है।