राजधानी के विद्यालयों में ऐसे कई शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे हैं, जो कहने को हरिद्वार के विद्यालयों में तैनात हैं। इनकी नियुक्ति हरिद्वार के विद्यालयों में है, लेकिन अफसरों की मेहरबानी से यह दून में नौकरी कर रहे हैं। रोक के बावजूद इन्हें दून के स्कूलों में व्यवस्था पर तैनाती दी है। इसके अलावा विभिन्न कार्यालयों में भी बड़ी संख्या में शिक्षक अटैच हैं।
हरिद्वार क्षेत्र के करीब चार दर्जन शिक्षक दून के अलग-अलग माध्यमिक विद्यालयों में काम कर रहे हैं। इनमें से ज्यादातर शिक्षकों को ऐसे विद्यालयों में अटैच किया है, जहां छात्र संख्या कम है। कुछ शिक्षक ऐसे विद्यालयों से भी संबद्ध किए गए हैं, जहां पहले से पर्याप्त शिक्षक तैनात हैं। इससे जहां दून के स्कूलों को उनका लाभ नहीं मिल पा रहा है, वहीं हरिद्वार के विद्यालयों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके अलावा, सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी के बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षकों को विभिन्न कार्यालयों से अटैच किया है। शिक्षा निदेशालय, शिकायत एवं सुझाव प्रकोष्ठ, खेल विभाग, मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय में ऐसे कई शिक्षक हैं, जो स्कूलों में पढ़ाना छोड़कर बाबूगिरी कर रहे हैं।
प्राथमिक में 500 शिक्षक तैनात
प्राथमिक विद्यालयों में करीब 500 शिक्षक व्यवस्था पर तैनात हैं। वर्ष 2017 विधानसभा चुनावों की आचार संहिता लगने से ऐन पहले इन शिक्षकों को अटैच कर दिया था। यह शिक्षक तब से इसी व्यवस्था पर चल रहे हैं। इनमें से ज्यादातर के मूल विद्यालयों में गिनती के शिक्षक तैनात रह गए हैं।
विद्यालयों में शिक्षकों की कमी न हो इसके लिए पहले भी अटैचमेंट समाप्त करने के निर्देश दिए थे। कई शिक्षकों को जरूरी होने पर अटैच किया गया है। फिर भी नियमानुसार अटैचमेंट समाप्त करने की कार्रर्वाई की जाएगी। - डॉ. आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव, शिक्षा