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Dehradun News: ढलान पर बेकाबू हो रहे विभागों के प्लान

Fri, 16 Oct 2026 02:50 AM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
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आशारोड़ी से मोहब्बेवाला के बीच ढलान पर सिर्फ ट्रक नहीं बल्कि विभागों के प्लान भी बेकाबू हो रहे हैं। किसी भी प्लान का कोई नतीजा अब तक सामने नहीं आया है। हर हादसे के बाद विभाग आते है निरीक्षण करते हैं फिर सुझाव दे जाते हैं। हालांकि, कुछ उपाय भी किए गए लेकिन इनका भी कुछ नतीजा नहीं निकला। हालात ये बने किए 25 दिन में पांच हादसे हो गए। यानी औसतन हर पांचवे दिन एक हादसा।
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दरअसल, मोहब्बेवाला का ढलान हाल के दिनों में नहीं बना। यहां हादसे पहले भी होते थे लेकिन एक्स्प्रेसवे बनने के बाद यह ढलान और तीव्र हो गया। ऊंचा वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर बनने के बाद शहर में घुसते ही यह ढलान कई गुना घातक हो गया। हादसों का सिलसिला नवंबर 2024 में शुरू हुआ था। उस वक्त एक्सप्रेस वे इस कॉरिडोर से वाहनों की आवाजाही शुरू ही हुई थी। 14 नवंबर 2024 को एक कंटेनर पलटा और एक व्यक्ति की इसके नीचे दबने से मौत हो गई। उस वक्त प्रशासन ने यहां का दौरा किया तो कारण बताया गया कि यहां रोशनी की कमी है। ऐसे में यहां फ्लड लाइट लगा दी गई। हादसे फिर भी जारी रहे। कभी ईंटों से भरा ट्रक पलटा तो कभी टाइलों से लदा ट्रक दीवार में घुस गया। हादसों का यह सिलसिला एक्सप्रेस वे के औपचारिक शुरूआत से और तेज हो गया। अप्रैल में उद्घाटन के अगले ही दिन यहां पर एक ट्रक अनियंत्रित हो गया।
पेंट से लदे इस ट्रक ने कई पेड़ों को तोड़ डाला और कई वाहन क्षतिग्रस्त कर दिए। अब फिर यहां अफसरों का दौरा हुआ तो गति को नियंत्रित करने के लिए रंबल स्ट्रीप का सुझाव दिया गया। कुछ दूरी पर यह स्टि्रप लगाई गईं। हादसों मे इन के कारण या फिर इत्तेफाक रहा कि तीन महीने तक कोई हादसा नहीं हुआ। इसके बाद फिर से 20 सितंबर से शुरू हुआ हादसों का दौर अब तक जारी है। इस दरम्यान कई एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी, प्रशासन और पुलिस अफसरों ने दौरे किए। सुझाव के बाद यहां कई उपाय किए गए। दुर्घटना संभावित क्षेत्र, गति सीमा, बैरियर, गति अवरोधक सब लगा दिए गए। बावजूद इसके हादसे जारी हैं। अब बृहस्पतिवार को हुए हादसे में एक और जान चली गई। निरीक्षण दर निरीक्षण में की जा रही प्लानिंग का अब तक कोई परिणाम सामने नहीं आया है।
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एक निजी और एक सरकारी एजेंसी भी रिसर्च में जुटी
गत पांच अक्तूबर को हुए हादसे के बाद आरटीओ, लोनिवि, राजमार्ग प्राधिरण और प्रशासन ने फिर एक बार दौरा किया। यहां पर बताया गया कि एनएचएआई ने रिसर्च के लिए यहां पर सीआरआरआई को भी लगाया है। इसके साथ ही परिवहन विभाग की टीम यहां पर जेपीआरआई की टीम को लेकर पहुंची थी। अब ये दोनों टीम भी हादसों के कारणों की पड़ताल कर रही है। बताया जा रहा है कि जेपीआरआई की टीम एक दो दिनों में विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंप भी सकती है।
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अब तक ये हुए उपाय
-ट्रैफिक साइन बोर्ड: क्षेत्र में गति सीमा और चेतावनी दर्शाने के लिए कुल 58 साइन बोर्ड लगाए गए हैं।
-रंबल स्ट्रिप्स: वाहनों की गति पर नियंत्रण रखने के लिए 485 मीटर क्षेत्र में रंबल स्ट्रिप्स (गति अवरोधक पट्टियां) बनाई गई हैं।
-मीडियन मार्कर: सड़क के बीच स्पष्ट विभाजन और रात में सही दिशा के लिए 1,880 मीटर मीडियन मार्कर लगाए गए हैं।
-सोलर स्टड्स: रात की दृश्यता (विजिबिलिटी) सुधारने के लिए 500 मीटर क्षेत्र में सोलर स्टड्स स्थापित किए गए हैं।
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