अरुणेश पठानिया
सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह डांवांडोल हैं। 108 सेवा व खुशियों की सवारी रुकती-चलती रहती है। चिकित्सा सेवा के लिए पूरे शरीर का ख्याल रख पाना मुश्किल हो रहा है।
नाकामी पर कोई जवाब नहीं सूझ रहा है। इसीलिए शायद अब अंग विशेष पर फोकस कर सुविधाएं मुहैया कराना सरकार की प्राथमिकता होने जा रहा है। शुरुआत दांत से होगी।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में अब ओरल हेल्थ यानी दंत चिकित्सा पर जोर दिया जाएगा। प्रदेश में दंत चिकित्सा की कमजोर हालात को देखते हुए केंद्र को प्रस्ताव भेजा जा रहा है जिसमें सीएचसी स्तर पर दंत चिकित्सा सुविधा और सभी जिला अस्पतालों में दंत विशेषज्ञ चिकित्सा की कोशिश की जाएगी।
इससे प्रदेश में दंत चिकित्सकों की भर्ती भी की जाएगी। दंत चिकित्सा के क्षेत्र में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं बेहद पिछड़ी हुई हैं। 105 पद में से 65 पर नियमित चिकित्सक तैनात है जबकि लगभग 20 पद संविदा पर हैं। अस्पतालों में डेंटल सेंटर का अर्थ सिर्फ दांत निकालने भर से है।
उपकरणों की भारी कमी के साथ ही दंत विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी झेल रहे विभाग को सुविधा संपन्न बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसमें जिला अस्पतालों में डेंटल सेक्शन को अत्याधुनिक बनाने के लिए नए उपकरणों और सर्जरी की सुविधा मिलेगी।
मिशन के तहत अगले वित्तीय वर्ष 2015-16 में ओरल हेल्थ को लेकर एक व्यापक कार्ययोजना केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। जबकि कुछ राज्यों में इसको पहले ही शामिल किया जा चुका है।