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दून में दांत दर्द का इलाज बेहद 'खतरनाक'

Sun, 18 Jan 2015 12:53 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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अरुणेश पठानिया
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सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह डांवांडोल हैं। 108 सेवा व खुशियों की सवारी रुकती-चलती रहती है। चिकित्सा सेवा के लिए पूरे शरीर का ख्याल रख पाना मुश्किल हो रहा है।

नाकामी पर कोई जवाब नहीं सूझ रहा है। इसीलिए शायद अब अंग विशेष पर फोकस कर सुविधाएं मुहैया कराना सरकार की प्राथमिकता होने जा रहा है। शुरुआत दांत से होगी।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में अब ओरल हेल्थ यानी दंत चिकित्सा पर जोर दिया जाएगा। प्रदेश में दंत चिकित्सा की कमजोर हालात को देखते हुए केंद्र को प्रस्ताव भेजा जा रहा है जिसमें सीएचसी स्तर पर दंत चिकित्सा सुविधा और सभी जिला अस्पतालों में दंत विशेषज्ञ चिकित्सा की कोशिश की जाएगी।

इससे प्रदेश में दंत चिकित्सकों की भर्ती भी की जाएगी। दंत चिकित्सा के क्षेत्र में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं बेहद पिछड़ी हुई हैं। 105 पद में से 65 पर नियमित चिकित्सक तैनात है जबकि लगभग 20 पद संविदा पर हैं। अस्पतालों में डेंटल सेंटर का अर्थ सिर्फ दांत निकालने भर से है।

उपकरणों की भारी कमी के साथ ही दंत विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी झेल रहे विभाग को सुविधा संपन्न बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसमें जिला अस्पतालों में डेंटल सेक्शन को अत्याधुनिक बनाने के लिए नए उपकरणों और सर्जरी की सुविधा मिलेगी।

मिशन के तहत अगले वित्तीय वर्ष 2015-16 में ओरल हेल्थ को लेकर एक व्यापक कार्ययोजना केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। जबकि कुछ राज्यों में इसको पहले ही शामिल किया जा चुका है।
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दांत तोड़ना, यानी सरकारी अस्पताल

स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी का कहना है कि उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। प्रदेश में दंत रोग जांच इकाइयां बेहद कमजोर हैं। सरकारी अस्पतालों की दंत इकाइयां सिर्फ दांत तोड़ने तक सीमित है। नेगी ने कहा कि डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों के समर्पण के जरिए इसे बेहतर स्थिति में लाया जा सकता है।

दून अस्पताल में बोन मैरो डेंसिटी मशीन का शुभारंभ करने के बाद अस्पताल के सभागार में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अगले बजटीय सत्र में दंत रोग जांच इकाइयों को सशक्त बनाने के लिए प्रावधान रखा जाएगा।

उन्होंने कहा कि हर साल राज्य के सरकारी अस्पतालों से यूजर चार्ज के तौर पर सरकार को 34 करोड़ रुपए मिलते हैं। केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्ताव रखा कि अगर यह रकम सालाना केंद्र से मिल जाए तो अस्पतालों में मरीजों को सुविधाएं मुफ्त मिल सकती हैं। मौके पर विधायक राजकुमार, डा. एसपी अग्रवाल, डा. आरएस असवाल आदि मौजूद रहे।

दिखाने के दांत, यानी मशीन शुरू, दवा खत्म
दून अस्पताल में शनिवार को एक तरफ शरीर में कैल्शियम जांचने की मशीन का उद्घाटन हो रहा था तो दूसरी ओर मरीज कैल्शियम की गोली के लिए भटक रहे थे। नाराज मरीजों ने काउंटर पर हंगामा कर दिया। उद्घाटन कार्यक्रम में खलल रोकने के लिए प्रबंधन ने आनन-फानन में वीआईपी मरीजों के लिए रिजर्व दवा काउंटर पर भेज मामला शांत कराया।

दून अस्पताल में लगी हड्डियों में कैल्शियम की जांच के लिए बोन मेरो डेंसिटी (बीएमडी) मशीन का उद्घाटन एक महीने के इंतजार के बाद शनिवार को स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने किया। इस बीच अस्पताल के दवा काउंटर पर कैल्शियम की गोली न मिलने से नाराज मरीजों ने हंगामा कर दिया।

इस पर प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरएस असवाल ने प्रभारी फार्मेसी अधिकारी एसएस चौहान को तलब किया। पता लगा कि काउंटर पर तीन दिन से कैल्शियम की दवा नहीं है। शिकायत स्वास्थ्य मंत्री तक न पहुंचे, इसके लिए अस्पताल कर्मचारी मरीजों को मनाने में जुट गए।

आनन-फानन में वीआईपी मरीजों के लिए बचाई कुछ कैल्शियम की गोलियां स्टोर से काउंटर पर पहुंचाई गईं। असवाल ने बताया कि फार्मेसी अधिकारी ने दवा कंपनी को एक हफ्ते पहले आर्डर दे दिया था। फैक्ट्री में कुछ समस्या आने के बाद दूसरी कंपनी को आर्डर दिया गया है।
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