देहरादून राजधानी में डेंगू का डंक लगातार पांव पसार रहा है। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर डेंगू से निपटने के प्रभावी उपाय होते नहीं दिख रहे हैं।
विभागीय मंत्री से लेकर अधिकारी तक बयानबाजी से आगे कुछ नहीं कर पा रहे हैं। आलम यह है कि राजधानी में केवल एक अस्पताल में ही मरीजों की जांच हो रही है। स्टाफ की कमी से जूझ रहे अस्पताल में जांच के लिए मरीजों को पूरे दिन भटकना पड़ रहा है। फिर भी रोजाना बड़ी संख्या में लोग बिना जांच कराए लौट रहे हैं।
डेंगू की जांच केवल राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हो रही है। लिहाजा यहां सुबह से ही मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ती है। अस्पताल की पैथोलॉजी में 25 कर्मियों की जरूरत है, जबकि केवल 14 ही तैनात हैं। इसमें से ज्यादातर रजिस्ट्रेशन, सैंपल कलेक्शन, जांच रिपोर्ट तैयार करने और बांटने में तैनात हैं।
दो लोगों के पास सैंपलों की जांच की जिम्मेदारी है, जिसमें से एक डेंगू के चलते छुट्टी पर है। ऐसे में मरीजों की जांच में बहुत ज्यादा समय लग रहा है। महिला अस्पताल में केवल एचबी, ब्लड ग्रुप और एएनसी के सैंपल लिए जा रहे हैं। इनकी जांच भी सेंट्रल लैब में ही होती है। वहीं, रोजाना करीब सौ भर्ती मरीजों के भी सैंपल लिए जाते हैं।
करीब छह सौ सैंपल की रोजाना जांच और रिपोर्ट तैयार करने में भी बहुत ज्यादा समय लग रहा है। ऐसे में किसी अन्य अस्पताल में भी डेंगू की जांच कराने की मांग उठने लगी है। घंटों तक जांच के लिए लाइनों में खड़े होने वाले मरीज दूसरे अस्पतालों में भी जांच की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।
वरिष्ठ आंदोलनकारी मोहन खत्री ने कहा कि कोरोनेशन और प्रेमनगर अस्पताल में भी डेंगू जांच की सुविधा उपलब्ध हो तो टीचिंग अस्पताल से मरीजों की भीड़ काफी हद तक कम हो जाएगी। इससे मरीजों की परेशानी भी कम हो सकेगी।
दो फॉगिंग मशीनों की जरूरत
कैंट क्षेत्र में डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए फॉगिंग के लिए दो मशीनों की जरूरत है। शुक्रवार को भाजपा महामंत्री व सांसद प्रतिनिधि महेश पांडे ने क्लेमेंटटाउन के सीईओ पंकज ठाकुर से मुलाकात कर फॉगिंग मशीन खरीदने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में फॉगिंग और दवाओं का छिड़काव नहीं हो रहा है। उन्होंने मौजूदा कंपनी का करार निरस्त कर दूसरी कंपनी को फॉगिंग का ठेका देने की मांग की।
प्राइवेट लैब नहीं करेगी डेंगू की पुष्टि
डेंगू के नाम पर लोगों को डराकर लूटने की शिकायत मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्राइवेट पैथोलॉजी लैब पर नकेल कसने का निर्णय लिया है। अब कोई भी प्राइवेट लैब डेंगू की पुष्टि नहीं कर सकेगी। उन्हें डेंगू की अपनी रिपोर्ट दून अस्पताल से प्रमाणिक करना होगी। प्रभारी सीएमओ डॉ. वाईएस थपलियाल के अनुसार प्राइवेट लैब रेपिड टेस्ट की पुष्टि भी नहीं करेंगे। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में प्राइवेट लैब संचालक लोगों को डेंगू होने का डर दिखाकर लूट रहे हैं।
आठ मरीजों में डेंगू पॉजिटिव
शुक्रवार को राजधानी में आठ नए मरीजों में डेंगू पॉजिटिव पाया गया है। इसके साथ ही राजधानी में कुल डेंगू रोगियों की संख्या 737 तक पहुंच गई है। वहीं, प्रदेश में अभी तक 784 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। हरिद्वार में 16 और नैनीताल में 27 मरीजों में डेंगू मिला है। वहीं, चार उत्तर प्रदेश के मरीजों में भी डेंगू पॉजिटिव पाया गया है।