हरिद्वार के बाद अब रुड़की और आसपास के क्षेत्रों में डेंगू का खतरा मंडराने लगा है। मंगलौर के मोहल्ला किला में रविवार को डेंगू संभावित मरीज की देहरादून में मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
दरअसल रुड़की में उपचार नहीं मिलने के कारण निजी चिकित्सक ने उसे हायर सेंटर देहरादून रेफर कर दिया था, जहां महंत इन्दिरेश अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
नगर के मोहल्ला किला निवासी अरशद (26 वर्ष, पुत्र नफीस) को चार दिन पहले बुखार हो गया था। उसने रुड़की के एक चिकित्सक से उपचार शुरू करवाया था। इसी दौरान उसकी तबियत ज्यादा बिगड़ गई।
चिकित्सक ने उसे डेंगू की संभावना जताते हुए प्लेटलेट्स अत्यधिक कम होने पर हायर सेंटर रेफर कर दिया था। परिजन उसे लेकर महंत इन्दिरेश अस्पताल पहुंचे, वहां उसका उपचार चल रहा था। शनिवार देर रात उसकी मौत हो गई। रविवार सुबह उसके शव को मंगलौर लाया गया और दफना दिया। बताया जा रहा है कि उसकी प्लेटलेट्स पांच हजार के नीचे आ गई थी, हालांकि चिकित्सक ने डेंगू की पुष्टि नहीं की गई।
सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक एके मिश्रा का कहना है कि वायरल में भी कई बार प्लेटलेट्स डाउन हो जाती है। मालूम हो कि सिविल अस्पताल रुड़की में डेंगू के लिए अलग से वार्ड बनाया गया है, लेकिन फिजिशियन नहीं होने से उपचार संभव नहीं है।
ऐसे में अधिकतर मरीजों को अन्य अस्पतालों की शरण लेनी पड़ रही है। मंगलौर पालिका अध्यक्ष इस्लाम चौधरी का कहना है कि अरशद की तबियत अचानक खराब हो गई थी। उसके बाद प्लेटलेट्स कम होने पर वह कोमा में चला गया था।
दो दिन तक उसे वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। हरिद्वार में अब तक सात लोगों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। इस संबंध में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों संग रविवार को बैठक कर दिशा-निर्देश दिए।