इसके ज्यादातर लक्षण अन्य वायरल से मिलते हैं। डॉक्टरों के अनुसार वायरल में डॉक्टर की सलाह से उपचार करवाना चाहिए। बहुत अधिक घबराने से भी नुकसान होता है।
प्लेटलेट्स की उम्र केवल 48 घंटे
प्लेटलेट्स की उम्र केवल 48 घंटे की होती है। ताजा खून से केवल 48 घंटे के भीतर प्लेटलेट्स अलग किए जा सकते हैं। इसके बाद खून से प्लेटलेट्स को अलग नहीं किया जा सकता। प्लेटलेट्स को इससे ज्यादा समय तक सुरक्षित नहीं रखा जा सकता है।
ऐसा हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें
डॉक्टरों के अनुसार, डेंगू और सामान्य वायरल के ज्यादातर लक्षण एक जैसे होते हैं। लेकिन मुंह-नाक से खून निकलने, हाथ-पैर ठंडे पड़ने, पेट में असहनीय दर्द होने, बार-बार उल्टी होने और बेहोशी छाने की स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
पानी की कमी से बचें
डेंगू के दौरान शरीर में पानी की कमी नुकसानदायक हो सकती है। इसलिए मरीज को समय-समय पर पानी पिलाते रहें। इसके अलावा छाछ, नींबू पानी और नारियल पानी भी फायदेमंद होता है। एंटी ऑक्सीडेंट के तत्वों से भरपूर कीवी, किशमिश जैसे फल और मेवे खूब खाएं।
प्लेटलेट्स घटने का मतलब यह नहीं कि आपको डेंगू हो गया हो। आमतौर पर सभी तरह के वायरल में खून में प्लेटलेट्स की कमी हो जाती है। खान-पान का भी प्लेटलेट्स पर असर पड़ता है। ऐसे में इनमें उतार-चढ़ाव सामान्य बात है। हालांकि बहुत अधिक अंतर को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
डॉ. प्रवीन पंवार, वरिष्ठ फिजिशियन, गांधी शताब्दी अस्पताल
कई बार संक्रमण की वजह से भी प्लेटलेट्स कम हो जाती है। वायरल से लेकर मलेरिया, टायफाइड और कैंसर जैसी बीमारियों में भी प्लेटलेट्स कम होती है। प्लेटलेट्स की कमी के कारण अक्सर एलर्जी की समस्या होती है, लेकिन इसे डेंगू का लक्षण नहीं कहा जा सकता है।
डॉ. एसके गुप्ता, सीएमओ
डेंगू फैलाने वाले टाइगर (एडीज मच्छर) ने दूनवासियों पर वार करने शुरू कर दिए हैं। आलम यह है कि बीते दो दिनों में सात लोग मच्छर के हमलों के शिकार होकर अस्पताल पहुंच चुके हैं, लेकिन इनसे लड़ने के लिए नगर निगम की तैयारियां अभी तक शुरुआती चरण में ही हैं। पर्याप्त बजट होने के बावजूद निगम ने अभी तक नई मशीनें और केमिकल नहीं खरीद सका है। मशीनों की खरीद का केवल प्रस्ताव तैयार हुआ है।
नगर निगम के पास पुरानी व्यवस्था (परिसीमन) के हिसाब से मशीनें और केमिकल की व्यवस्था है। मौजूदा समय में केवल 60 स्प्रे और 60 ही फॉगिंग मशीनें हैं। चार मशीनें बड़ी हैं, जिन्हें यूटिलिटी वाहन पर रखकर इस्तेमाल किया जाता है। चूंकि, अब नगर निगम का दायर बढ़ चुका है तो इसके लिए भारी मशीनें होनी चाहिए। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कैलाश जोशी ने बताया कि निगम ने 100 स्प्रे मशीनें खरीदने को प्रस्ताव तैयार किया है। इनके लिए बाद में टेंडर होंगे और फिर टेंडर हासिल करने वाली कंपनियों से खरीद की जाएगी।
तो ठिकाने लगाना है दो करोड़ का बजट
ऐसा नहीं है कि निगम के पास बजट की व्यवस्था नहीं है। निगम के पास दो करोड़ रुपये का बजट है। बावजूद इसके अभी तक महज 19 लाख रुपये ही खर्च हो पाए हैं। इसमें सात लाख रुपये का केमिकल खरीदा गया है और 12 लाख रुपये की मशीनों की खरीद होनी है। इस रफ्तार से तैयारी से लगता है कि सिर्फ बजट ठिकाने लगाने तैयारी है।
दो से ढाई हजार लीटर लगता है केमिकल
हर साल नगर निगम फॉगिंग और स्प्रे में लगभग दो से ढाई हजार लीटर केमिकल का इस्तेमाल करता है। इस केमिकल की एक लीटर की मात्रा 150 लीटर डीजल में मिलाकर स्प्रे और फॉगिंग की जाती है। मौजूदा स्थिति में नगर निगम के पास केवल 200 लीटर से थोड़ा ज्यादा ही केमिकल है।