मानदेय बढ़ाए जाने की मांग को लेकर भोजनमाताओं ने जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय पर प्रदर्शन किया। भोजनमाताओं ने वेतनमान तीन हजार से बढ़ाकर पांच हजार रुपये किए जाने की मांग उठाई।
भोजनमाता मंजू भंडारी ने कहा कि भोजनमाताएं पिछले 20 वर्षों से विद्यालयों में भोजन बनाने का कार्य कर रही हैं। इसके लिए उन्हें मात्र तीन हजार रुपये प्रति माह मानदेय दिया जाता है। बढ़ती महंगाई में यह नाकाफी है। जबकि, भोजनमाताओं से विद्यालयों में भोजन बनाने, बच्चों को भोजन वितरण करने, किचन की सफाई के अलावा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का कार्य भी करवाया जा रहा है। इसका उन्हें कोई भुगतान नहीं किया जाता।
बसंती ने कहा कि उत्तराखंड में लगभग 25 हजार भोजनमाताएं हैं। जिनको उत्तराखंड सरकार ने माता (भोजनमाता) शब्द से नवाजा, लेकिन मानदेय नहीं बढ़ाया जा रहा है। भोजन माता संगठन की कोषाध्यक्ष नीता ने कहा कि सरकार मिड डे मील योजना को गैर सरकारी संस्था को सौंप रही है। इससे उनके रोजगार पर भी संकट है।
कहा कि पिछले साल शिक्षा सचिव ने मानदेय पांच हजार रुपये करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा था। इस पर अभी तक अमल नहीं किया गया है। उन्होंने मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर संघर्ष करने की बात कही।