शिक्षा के अधिकार अधिनियम की फिर से समीक्षा कर आठवीं तक बच्चों को फेल न करने की पॉलिसी में बदलाव किया जाए। वहीं शिक्षकों के चयन के लिए अलग से आयोग गठित हो। आरटीई के विस्तारीकरण एवं नई शिक्षा नीति को लेकर इंडिया हैबिटेट सेंटर नई दिल्ली में हुई बैठक में उत्तराखंड की ओर से शिक्षा मंत्री ने इसकी मांग की। उन्होंने कहा कि आरटीई के तहत बच्चों की प्रतिपूर्ति पर खर्च 91 करोड़ रुपया अवमुक्त किया जाए।
राज्य मंत्री मानव संसाधन विकास मंत्रालय महेंद्रनाथ पांडे की अध्यक्षता में हुई बैठक में उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात के शिक्षा मंत्रियों और शिक्षाविदों ने अपने विचार रखे। उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए कक्षा एक से आठवीं तक बच्चों को फेल न करने की नीति में बदलाव किया जाए।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत 25 प्रतिशत बच्चों का प्रवेश प्राइवेट विद्यालयों में किया जाता है, इससे राज्य सरकार के कोष से अरबों रुपया खर्च हो रहा है, जिससे अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हो रहे हैं। साथ ही इससे सरकारी विद्यालयों में छात्र संख्या में लगातार गिरावट आ रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया की बच्चों की प्रतिपूर्ति के लिए 91 करोड़ रुपया जो राज्य सरकार द्वारा खर्च किया गया है तत्काल अवमुक्त किया जाए।