तीर्थ नगरी ऋषिकेश से दून को सीधी रेल सेवा से जोड़ने का प्रस्ताव वर्षों बाद भी साकार नहीं हो पाया है।
जबकि इस रेलमार्ग के बनने से जहां युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर मिलते, वहीं व्यापारियों को भी फायदा होता। दून से ऋषिकेश का आवागमन भी सुविधाजनक हो जाता। अब एक बार फिर लोगों की उम्मीद जगी है कि इस साल के रेल बजट में दून-ऋषिकेश ट्रैक पर बात आगे बढ़ेगी।
देहरादून से सटे क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयों के विस्तार और रोजगार के साधन बढ़ने से दून-ऋषिकेश प्रस्तावित रेलमार्ग की अहमियत और बढ़ गई है। ऋषिकेश और उससे सटे ग्रामीण क्षेत्रों से प्रतिदिन करीब 15 हजार से अधिक लोग रोजगार के लिए देहरादून, सेलाकुई और आसपास की जगहों पर आवाजाही करते हैं।
इसके अलावा दून के राजधानी होने की वजह से भी बड़ा तबका रोजाना इस रूट पर आवागमन करता है। बस से देहरादून आने में करीब डेढ़ घंटे का वक्त लग जाता है। दूसरा बड़ा खतरा ऋषिकेश-दून सड़क मार्ग पर हाथियों का रहता है।
हाथियों के आतंक के चलते कई बार रात के आठ बजे के बाद सड़क मार्ग पर आवाजाही ठप हो जाती है। यही वजह है कि क्षेत्र के कई बेरोजगार चाहकर भी नौकरी के लिए अपडाउन नहीं कर पाते। इस रूट पर रेल सेवा शुरू होने से समय तो कम लगेगा ही लोगों के सामने रोजगार के अवसर भी सरल होंगे।
अंग्रेजों के जमाने में हो चुका है सर्वे
जानकार बताते हैं कि देहरादून-हरिद्वार रेलवे लाइन शुरू करने के बाद अंग्रेजों ने दून-ऋषिकेश लाइन का सर्वे किया था। देहरादून के राजधानी बनने के बाद एक बार फिर दून-ऋषिकेश सीधी रेल लाइन के लिए ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों की जनता, व्यापारियों और युवाओं ने इसे बनाने की मांग उठाई। लेकिन सरकारों के उपेक्षित रवैये की वजह से यह मुहिम आगे नहीं बढ़ पाई।