उन्होंने बताया कि सफेद बाघ को क्वारंटीन में रखने का मकसद उसके स्वास्थ्य पर नजर रखना है क्योंकि किसी भी जानवर को जब एक जगह से दूसरी जगह लाया जाता है तो उसका मानसिक तनाव बढ़ जाता है। इसलिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के 30 दिनों के नियम अनुसार उस अवधि में हम उसके खान-पान, मल-मूत्र और असामान्य व्यवहार पर नजर रखते है।
जू की वन क्षेत्राधिकारी दीक्षा भट्ट ने बताया कि महीने के अंत तक सफेद बाघा को फिटनेस टेस्ट के बाद बाड़े में रखा जाएगा। इसके लिए तैयारी लगभग पूरी कर ली गई हैं। बताया कि तेजस दो साल तीन महीने का सफेद बाघ है, जो मध्यप्रदेश के जू से 28 सितंबर को लाया गया था। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि जू में सभी जानवरों के साथ प्रेम पूर्वक व्यवहार करें, अगर वो आपकी तरफ नहीं देख रहे है तो उनपर पत्थर न डालें।