सूंघकर पता कर रहे दूसरे बाघ का इलाका
वन विभाग के एसडीओ सुनील बलूनी बताते हैं कि टेरेटरी बनाना बाघ का स्वभाव है। बाड़े में खोले जाने के बाद से ही दोनों बाघ अपनी टेरेटरी बना रहे हैं। दोनों बाघ नर होने के कारण आपसी संघर्ष का खतरा है। इसलिए एक बार में एक ही बाघ को बाड़े में खुला छोड़ा जाता है। जब विक्रम बाहर खुला होता है तो वह अपने मूत्र से जमीन पर निशान लगाकर क्षेत्र निर्धारण करता है। वहीं, भोला को छोड़े जाने पर वह सूंघकर यह पता करने का प्रयास करता है कि जहां वह निशान लगा रहा है, वहां पहले से विक्रम ने तो टेरेटरी नहीं बना रखी है। इसी तरह पेड़ पर पंजे मारकर भी बाघ निशान लगा रहे हैं।
यह मेरी सीमा, इसमें प्रवेश न करें
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. जीएस कुसारिया बताते हैं कि बाघों की टेरेटरी 50 किमी से भी ज्यादा क्षेत्र में होती है। वह पेशाब से टेरेटरी का निर्धारण करते हैं, ताकि उसकी गंध से दूसरे बाघ को इलाके के बारे में पता लग सके। बाघ जमीन पर भी खरोंच करते हैं। वह दूसरे टाइगरों को संकेत देते हैं कि यह उनकी सीमा है। उसमें प्रवेश न करें। इसके अलावा मूत्र छिड़ककर, पंजा मारकर, आवाज निकालकर, मल जमा कर व गश्त कर बाघ अपनी टेरेटरी प्रदर्शित करते हैं।