देश-दुनिया में तेजी से बदल रही सामरिक परिस्थितियों के मद्देनजर मानचित्रों को बनाने में डिजिटल तकनीक का और अधिक इस्तेमाल करना होगा। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल तकनीक, सूचना व प्रौद्योगिकी और मानचित्र कला के बीच बेहतर समन्वय से मानचित्रों को बनाने में जहां सुविधाएं हुई हैं, वहीं चुनौतियां भी बढ़ गई हैं। उक्त बातें हाईड्रोग्राफी विभाग के चीफ हाईड्रोग्राफ र वाइस एडमिरल विनय ने कही। वह बुधवार को भारतीय राष्ट्रीय कार्टोग्राफी संघ (आईएनसीए) की ओर से आयोजित 39वें अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
आईएनसीए के अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस को संबोधित करते हुए महासर्वेक्षक लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कुमार (वीएसएम) ने कहा कि भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने विभिन्न राज्य सरकारों के साथ मिलकर सभी आबादी क्षेत्रों का ड्रोन के माध्यम से सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। जल्द पूरे देश में भारतीय सर्वेक्षण विभाग की ओर से आबादी के नक्शे बनाए जाएंगे। हरियाणा में किए जा रहे आबादी सर्वेक्षण का काम पूरा कर लिया है। इसे सभी राज्यों में लागू करने और समय सीमा में पूरा करने का निर्णय लिया है।
कर्नाटक व महाराष्ट्र में भी आबादी का सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। यूपी, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, गोवा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इसे शुरू कराने के लिए वार्ताएं चल रही हैं। उन्होंने बताया कि बाढ़ से बचाव के लिए राष्ट्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत नदियों के लिडार मैपिंग द्वारा बेहद सूक्ष्म मानचित्र तैयार किए जा रहे हैं। जिसे राष्ट्रीय जल शक्ति मंत्रालय संबंधित विभागों को साझा करेगा। इस मैपिंग के माध्यम से राज्य सरकारों को बाढ़ से बचाव के प्रबंधन करने में मदद मिलेगी।
शांति निकेतन विवि के प्रोफेसर विजय झा ने बताया कि ऐसे डाटा को न केवल बनाना जरूरी है, बल्कि उसका विभिन्न विभागों में साझा करना भी आवश्यक है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग के अपर महासर्वेक्षक नवीन तोमर ने कहा कि भारतीय सर्वेक्षण विभाग की स्थापना 40 साल पूर्व 1979 में हुई थी। यह भारतीय राष्ट्रीय कार्टोग्राफी संघ का वार्षिक कांग्रेस चित्रकला से संबंधित विचार विमर्श का एक मुख्य मंच है। कांग्रेस में दर्जनभर से अधिक वैज्ञानिकों ने कार्टोग्राफी डिजिटल मैप के क्षेत्र में किए गए कई शोधपत्र पढ़े।