सर्विलांस के माध्यम से पता चला कि कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबरों से भी गीता ने बात की है। इन नंबरों के आधार पर पुलिस गीता के मायके देवबंद तक पहुंच गई। यहां उसके भाई अजय कुमार से पूछताछ की गई। अजय ने पुलिस को बताया कि गीता का गत दो फरवरी को उसे फोन आया था। गीता ने बताया था कि उसने अपने पति के साथ मिलकर एक व्यक्ति की हत्या कर दी है। शव को ठिकाने लगाना है। गीता की बात सुनकर अजय कुमार तैयार हो गया और उसने अपने जीजा धनराज चावला को बुला लिया।
धनराज और अजय चार फरवरी को देहरादून पहुंचे और गुरुजी के शव को प्लास्टिक के कट्टे में रस्सियों से बांधकर कार की डिक्की में घरेलू सामान के साथ रख लिया। इसके बाद शव को साखन स्थित नहर में फेंक दिया। एसएसपी ने बताया कि पुलिस ने कैलाशपुर कॉलोनी देवबंद के रहने वाले धनराज और सनी कॉलोनी देवबंद के रहने वाले अजय को गिरफ्तार कर लिया है। अभी गीता और हिमांशु चौधरी का पता नहीं चल सका है। इनकी तलाश में तीन टीमें लगाई गई हैं। हिमांशु चौधरी शहर के एक मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है।
आईएसबीटी के पास खड़ी कर दी मोटरसाइकिल
आरोपियों ने गत चार फरवरी को गुरुजी की मोटरसाइकिल को आईएसबीटी के पास एक खाली प्लॉट में खड़ा कर दिया था। मोटरसाइकिल की नंबर प्लेट भी तोड़कर वहीं झाड़ियों में फेंक दिया। ताकि, सबको लगे कि श्यामलाल मोटरसाइकिल यहां खड़ी कर बस से कहीं चले गए हैं। पुलिस ने यह मोटरसाइकिल और नंबर प्लेट भी बरामद कर ली है। पुलिस इन आरोपियों के आपराधिक इतिहास की जानकारी भी कर रही है। तीन दिनों की पुलिस कस्टडी रिमांड में लेकर पूछताछ की जा रही है।
अक्सर घर से चले जाते थे श्यामलाल
श्यामलाल गुरुजी करीब 20 साल पहले राजकीय इंटर कॉलेज से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने पीठावाला में ही घर बना लिया था। यहां पर उनकी छोटी पुत्री उनके साथ रहती थी। जबकि, बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है। श्यामलाल के गुम हो जाने के पांच दिन बाद उनकी पुत्री ने गुमशुदगी दर्ज कराई थी। बताया जा रहा है कि इसकी वजह यह भी है कि वह अक्सर घर से चले जाते थे। यही कारण था कि परिजनों ने उनकी पहले तलाश की और फिर पांच दिन बाद पुलिस को सूचना दी।