भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच लगातार टकराव होता रहता है। इसके चलते भूकंप को लेकर संवेदनशीलता बनी रहती है। राज्य में 1911 से रिक्टर स्केल पर छह की तीव्रता से अधिक के 11 बड़े भूकंप आ चुके हैं। अब भूकंप के खतरे के दृष्टिगत राज्य में सेंसरों, सायरनों की संख्या बढ़ाने समेत अन्य कदम उठाए जाएंगे।
राज्य में 28 अगस्त 1916 के दिन सबसे बड़ा भूकंप आया था। इस दिन 6.96 तीव्रता का भूकंप मापा गया था। वहीं, अगर 1975 से 2024 के बीच 49 वर्षों की बात करें तो रिक्टर स्केल पर सात या उससे अधिक की तीव्रता वाला कोई भी भूकंप नहीं आया है। अधिकांश रिक्टर स्केल स्केल पर तीन से चार की तीव्रता वाले भूकंप आए हैं। इसमें तीन से चार की तीव्रता वाले भूकंप 320, चार से पांच वाले 90, पांच से छह के 34, छह से सात वाले तीन आए हैं।
सेंसरों की संख्या बढ़ाई जाएगी
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन कहते हैं कि भूकंप की आशंका के दृष्टिगत सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। हाल में भूकंप को लेकर मॉक डि्रल कराई गई है। इसके अलावा भूकंप को लेकर सायरन और सेंसरों की संख्या बढ़ाई जाएगी। जन जागरूकता को लेकर भी कदम उठाए जाएंगे।
पहले दो जोन में रखा गया था राज्य को
पहले भूकंप की दृष्टि से राज्य को दो जोन में रखा गया था। इसमें सबसे अधिक संवेदनशील जोन पांच में रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ थे। जबकि जोन चार में उत्तरकाशी, टिहरी गढ़वाल, देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल शामिल थे।
2021 में सबसे अधिक संवेदनशील जिलों में चार जिले शामिल थे
लोकसभा में वर्ष-2021 में दिए एक उत्तर में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी व पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री ने भूकंप की दृष्टि से अधिक संवेदनशील 38 शहर और कस्बों की जानकारी दी थी। इसमें अल्मोड़ा, नैनीताल, देहरादून, रुड़की शामिल हैं।