अफगानिस्तान के काबुल में सोमवार को हुए बस में आत्मघाती बम धमाके में मारे गए देहरादून के दोनों व्यक्तियों के शव शुक्रवार को दून पहुंचे। शव देखते ही दोनों घरों के परिजनों में कोहराम मच गया।
गोविंद सिंह का अंतिम संस्कार पटेलनगर स्थित मुक्तिधाम में हुआ जबकि गणेश थापा का हरिद्वार स्थित खड़खड़ी शमशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। शुक्रवार सुबह करीब छह बजे दिल्ली से अलग-अलग एंबुलेंस में दोनों के शव दून पहुंचे। गणेश का शव लेकर उनके भाई ललित बहादुर थापा आए।
शव जैसे ही पुरोहित वाला स्थित उनके आवास पहुंचा तो वहां उनके परिजनों को चीखना चिल्लाना शुरू हो गया। गणेश की माता पानमति थापा, पत्नी रुकमणि थापा, बेटी सुप्रिया और बड़े भाई सूरज शव से लिपटकर रोने लगे। इस दौरान आसपास के लोगों के आंख में भी आंसू आ गये।
भाई का शव काबुल से लेकर आये बड़े भाई ललित ने सभी को संभाला। शव को कुछ देर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। इस दौरान लोगों ने गणेश थापा को श्रद्घांजलि दी। बाद में शव को हरिद्वार ले जाया गया। जहां खड़खड़ी शमशान घाट पर सबसे बड़े भाई सूरज ने चिता का मुखाग्नि दी।
गणेश थापा की शव यात्रा में मसूरी विधायक गणेश जोशी, पूर्व विधायक जोत सिंह गुंसोला, गोदावरी थापली, उपेंद्र थापली, उमा उपाध्याय, संध्या थापा सहित सैकड़ों लोग शामिल हुए। वहीं गोविंद सिंह का शव देखकर उनकी मां सुमित्रा देवी और पत्नी बेसुध हो गई।
गोविंद का अंतिम संस्कार चंद्रबनी स्थित मुक्ति धाम शमशान घाट पर किया गया। गोविंद के छोटे भाई अरविंद थापा ने उनकी चिता का मुखाग्नि दी।
गोविंद की शव यात्रा में चंद्रबनी गोरखा संघ अध्यक्ष पी बी मल्ला, सचिव भीम बहादुर, छेत्र पंचायत सदस्य हरेंद्र सिंह गुसाई, राजेश मल्ल, अनिल थापा (उपप्रधान), पूर्व ग्राम प्रधान रविन्द्र वालिया, समाज सेविका पूजा सुब्बा, सहित सैकड़ों लोग मौजूद थे।
घर बनवाया, लेकिन नहीं कर पाया गृहप्रवेश
परिवार को खुशहाल रखने के लिए गोविद सिंह ने घर और देश छोड़कर विदेश में नौकरी करने चले गये। पैसा कमाया, परिवार को खुश रखा, नया मकान बनवाया लेकिन नये मकान में गृहप्रवेश से पहले उनकी मौत हो गयी।
ऐसे में परिजनों की खुशी मातम में छा गयी। बताया जा रहा है कि गोविंद सिंह ने गृहप्रवेश की पुरी तैयारी कर ली थी। इस बार की छुट्टी आने पर गृहप्रवेश किया जाना था। लेकिन शायद खुदा को यह मंजूर नहीं था।