बायो रेमिडिएशन पद्धति से इस तरह होगा निपटान
बायो रेमिडिएशन पद्धति के तहत मौजूद कूड़े को प्रोसेस किया जाता है। इसके लिए एक से दो ट्रॉमल लगाए जाते हैं। जिसके जरिये आरडीएफ (रिफ्यूज ड्राई फ्यूल) और कंपोस्ट को कूड़े में से अलग किया जाता है। शेष का एचडीपीई लाइनर, जियो सिंथेटिक क्लेलाइनर आदि प्रोसेस के जरिये वैज्ञानिक तरीके से उसकी कैपिंग कर दी जाती है।
कंपोस्ट और आरडीएफ से होगी कमाई
बायो रेमिडिएशन पद्धति के जरिये कूड़े का निस्तारण करने के बाद जो कंपोस्ट और आरडीएफ (रिफ्यूज ड्राई फ्यूल) निकलेगा। उसके जरिये निगम की कमाई होगी। कंपोस्ट का प्रयोग जहां खेतों में किया जा सकेगा वहीं ज्वलनशील होने के चलते आरडीएफ का इस्तेमाल शीशमबाड़ा स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में बनने वाले वेस्ट टू इनर्जी प्लांट में किया जा सकेगा।
इंदौर ने 40 साल से एकत्र हो रहे कूड़े के पहाड़ का जिस तरह से निस्तारण किया वह सराहनीय है। हम सहस्त्रधारा रोड स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड में एकत्र कूड़े के निस्तारण के लिए वहां का मॉडल अपनाएंगे। इसके लिए टीम को वहां भेजा जाएगा, जिससे उसका अनुसरण करने में आसानी हो सके।
-सुनील उनियाल गामा, मेयर