भारतीय जेल में एक नई पहल
दून जेल और तिनका तिनका के आपसी सहयोग से रिलीज की गई यह धुन का मकसद बंदियों की कला के लिए मंच प्रदान करना, देशभर के बंदियों को सकारात्मक कामों के लिए प्रेरित करना, बंदियों को कार्यकुशल बनाना और जेल सुधार के लिए भागीदारी करना है। यह सिग्नेचर ट्यून अब जेलों पर काम करने वाली संस्था तिनका तिनका फाउंडेशन की पहचान होगा। अक्तूबर, 2022 से इस परियोजना पर काम चल रहा था। तिनका तिनका फाउंडेशन और जिला जेल, उत्तराखंड ने बंदियों के सकारात्मक औऱ सृजनात्मक कामों को सामने लाने के लिए एक साझेदारी की है। इसके तहत सृजन की एक श्रृंखला तैयार की जाएगी। दिलचस्प बात यह भी है कि सिग्नेचर ट्यून का संपादन दून जेल में ही किया गया है।
अधिकारियों का सहयोग
इस अनूठी धुन को लाने में राज्य की जेल महानिरीक्षक विमला गुंज्याल, उपमहानिरीक्षक कारागार और देहरादून जेल के सीनियर सुपरिटेंडेंट दधिराम और जेलर पवन कोठारी का विशेष योगदान रहा है। इन तीनों ने उतराखंड की जेल में रेडियो को लाने में ऐतिहासिक पहल की है।
यूट्यूब पर हुआ रिलीज
जेल रेडियो का सिग्नेचर ट्यून तिनका तिनका प्रिजन रिफ़ार्मस के यूट्यूब चैनल- तिनका तिनका जेल रेडियो पर रिलीज किया गया है। यह फाउंडेशन का 65वां एपिसोड है।
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तिनका तिनका फाउंडेशन
तिनका तिनका फाउंडेशन की संस्थापक वर्तिका नन्दा ने 2019 में जिला जेल, आगरा और हरियाणा की जेलों में जेल रेडियो स्थापित किया है। वे जेल सुधारक हैं। तिनका तिनका भारतीय जेलों पर उनकी श्रृंखला है। वर्ष 2014 में वह भारत के राष्ट्रपति से स्त्री शक्ति पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं। जेलों पर उनके काम को दो बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी जगह मिली है। तिनका तिनका की टैगलाइन है- जेलों मे इंद्र्धनुष बनाने की कोशिश। भारतीय जेलों पर वर्तिका नन्दा के हालिया शोध को आईसीएसएसआर ने 'उत्कृष्ट' माना है। वे दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज में पत्रकारिता विभाग की प्रमुख हैं।