पहले महाराष्ट्र रहा फिर पश्चिम बंगाल में बनाई कंपनी
सुरेश शर्मा ने पूछताछ में बताया कि जमानत मिलने के बाद वह महाराष्ट्र में अपने रिश्तेदार के घर आ गया था। उसे जब पता चला कि उसकी जमानत खारिज हो गई है तो वह छुपने लगा। उसके घरवालों ने भी बुलाया मगर वह वापस नहीं आया। उसके बाद वह पश्चिम बंगाल चला गया। वहां उसने ठेली पर खाना बनाना शुरू किया। कुछ दिन बाद उसने स्क्रैप का काम शुरू किया और एक कंपनी बना ली। इसी कंपनी के काम से वह देश के कई हिस्सों में आता जाता रहता था। जब वह जमशेदपुर आया तो उसे पकड़ लिया गया।
गुपचुप लिए फिंगर प्रिंट्स तब हुई शर्मा होने की पुष्टि
दरअसल, 25 साल पहले फरार हुए सुरेश शर्मा का चेहरा काफी बदल गया है। एसटीएफ ने उसके चेहरे को कई संदिग्धों से मिलाया। कई सॉफ्टवेयर का सहारा भी लिया गया। इस बीच जब उसकी तलाश तेज हुई और उसके पश्चिम बंगाल में होने का पता चला तो एसटीएफ ने उसके चमोली जेल से फिंगर प्रिंट्स हासिल किए। इन फिंगर प्रिंट्स को उसके उठने बैठने के स्थान से मिलान कराया गया। तब जाकर उसकी पुष्टि हुई।