स्मार्ट सिटी पर सरकार के बड़े-बड़े दावे हवाई साबित हो रहे हैं। हकीकत यह है कि तमाम लोकलुभावन घोषणाओं के बावजूद सरकार स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट एक तहत एक भी योजना पर काम शुरू नहीं कर पाई है। योजना को लेकर बैठकों और चर्चाओं में ही साल भर करोड़ों रुपये फूंक दिए गए। लेकिन, एक भी प्रस्ताव फाइलों से बाहर नहीं आ पाया।
दावा ऐसा कि देहरादून की सूरत बदल जाएगी। लेकिन, हकीकत में स्थिति इससे अलहदा है। अतिरिक्त खर्च से बचने के लिए सभी विभागों के प्रस्तावों को जोड़कर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को अपडेट करने का भी दावा किया गया। इतना ही नहीं पिछले महीने देहरादून स्मार्ट सिटी परियोजना की उच्च स्तरीय संचालन समिति की बैठक में कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के लिए 234.85 करोड़ की डीपीआर पर मुहर भी लग गई। पर स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत कार्य कब शुरू होगा? इसका जवाब देने को कोई अधिकारी तैयार नहीं है। हालांकि उनका यह दावा जरूर है कि इस वर्ष काफी कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।
दावा-1
तीन स्मार्ट स्कूल बनाए जाएंगे। स्मार्ट सिटी के तहत साढ़े पांच करोड़ से अधिक धनराशि से राजकीय बालिका इंटर कॉलेज राजपुर रोड, राजकीय इंटर कॉलेज खुड़बुड़ा तथा जूनियर हाई स्कूल खुड़बुड़ा को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित किया जाना था, साथ ही इन स्कूलों में आईटी कंपोनेंट्स भी स्थापित किए जाने थे।
हकीकत - अभी तक इस पर कार्य शुरू नहीं हो सका है।
दावा-2
घंटाघर से सिल्वर सिटी लगेंगे सेंसर। राजपुर रोड पर घंटाघर से सिल्वर सिटी तक कम लागत वाले सेंसर लगाए जाने थे। जिससे वाहन चालकों को पता चल सके की पार्किंग की क्या स्थिति है? ऐसा होने से लोगों को जाम की समस्या से निजात मिल जाती।
हकीकत - इस पर भी कुछ नहीं हुआ।
दावा-3
दून की कई सड़कें बनेंगी स्मार्ट। स्मार्ट सिटी के तहत रिस्पना पुल से महाराजा अग्रसेन चौक (हरिद्वार रोड), स्वर्गीय अतुल माहेश्वरी चौक से बहल चौक (ईसी रोड), घंटाघर से दिलाराम चौक (राजपुर रोड) और घंटाघर से किशन नगर चौक (चकराता रोड) को स्मार्ट बनाने की बात कही गई थी। साथ ही इंटेलिजेंट ट्रैफिक सिस्टम, स्मार्ट पार्किंग समेत अन्य सुविधाएं भी विकसित की जानी थी।
हकीकत - इस पर भी कुछ नहीं हुआ।
दावा-4
योजना के तहत शहर के 22 चौराहों का चौड़ीकरण और सुंदरीकरण किया जाना है। इससे यातायात जाम की समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।
हकीकत - यह काम भी शुरू नहीं हो पाया।
दावा-5
स्मार्ट टॉयलेट लगेंगे। एक साल पहले हुई बैठक में शहर में कई स्थानों पर स्मार्ट टॉयलेट लगाने का निर्णय लिया गया था। जिसके तहत गांधी पार्क, परेड मैदान, कलेक्ट्रेट और कांवली रोड स्थित एमडीडीए कॉलोनी में स्मार्ट टॉयलेट लगाए जाने थे।
हकीकत - इस पर भी कोई कार्य शुरू नहीं हुआ।
दावा-6
आईटी पार्क में स्थापित होगा कमांड एंड कंट्रोल सेंटर। स्मार्ट सिटी के तहत बिजली, पानी, यातायात, सीवर आदि नागरिक सुविधाओं के लिए एक कंट्रोल (इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड सेंटर) रूम बनाया जाना था। जिसके जरिये स्मार्ट सिटी में दी जाने वाली सुविधाओं की निगरानी और संचालन किया जाना था।
हकीकत - इस पर भी कोई कार्य शुरू नहीं हुआ।
दावा-7
हाइब्रिड बस सेवा चलेगी। दूनवासियों को सुविधाजनक यातायात व्यवस्था उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्मार्ट सिटी के तहत शहर में हाइब्रिड बसें चलाने का निर्णय लिया गया है। जिसके तहत रेलवे स्टेशन से आईएसबीटी और आईएसबीटी से जौलीग्रांट हवाई अड्डे तक इस सेवा को शुरू किया जाना था।
हकीकत - इस पर भी काई कार्रवाई नहीं हुई।
दावा- 8
दून में लगेंगे 24 वाटर एटीएम। लोगों को साफ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शहर में वाटर एटीएम लगाए जाने हैं। ये वाटर एटीएम एडीबी की ओर से लगाए जाने हैं।
हकीकत - स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने बीते दिनों दावा किया था कि जनवरी में 24 स्थानों पर वाटर एटीएम लगाए जाएंगे। इसके इस माह के अंत तक लगने की संभावना है।
दावा- 9
करनपुर रोड का चौड़ीकरण व फुटपाथ निर्माण। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करनपुर रोड को सर्वे चौक से डीएवी कॉलेज और डीबीएस कॉलेज तक परिवहन के लिए बेहतर और चौड़ी सड़क बनाने के साथ ही सड़क के दोनों ओर फुटपाथ भी बनाया जाना था।
हकीकत - इस पर भी अभी तक कोई कार्य शुरू नहीं हुआ।
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को लेकर कहीं कोई देरी नहीं है। कार्यालय खुलने और स्टाफ आदि आने के चलते थोड़ा समय जरूर लगा है। 1400 करोड़ रुपये की तीन साल की इस परियोजना में जनवरी में करीब 500 करोड़ के टेंडर होने हैं। अब परियोजना रफ्तार पकड़ेगी।
- डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी, देहरादून स्मार्ट सिटी परियोजना