पुष्पांजलि बिल्डर्स लोगों का पैसा लेकर ही नहीं भागा बल्कि बैंकों को भी खासा नुकसान पहुंचा गया है। पंजाब नेशनल बैंक का करीब 20 करोड़ लोन न चुकाने पर अब बैंक बिल्डर दीपक मित्तल और उसकी पत्नी की संपत्ति को नीलाम करने जा रहा है। इस संबंध में बैंक ने नोटिस आदि प्रक्रिया भी पूरी कर ली है।
बैंक की ओर से जारी सूचना के अनुसार दीपक मित्तल ने पुष्पांजलि बिल्डर्स के कई प्रोजेक्ट के लिए लोन लिया था। इसके लिए दीपक मित्तल, उसकी पत्नी राखि मित्तल और एक अन्य ने अपनी संपत्तियों को बैंक में बंधक रखा है। गत मार्च तक लोन की असल राशि लगभग साढ़े 19 करोड़ रुपये है। जबकि, इस बार ब्याज की रकम लगभग 75 लाख रुपये है। बैंक गत एक मार्च को पुष्पांजलि बिल्डर्स के लोन अकाउंट को एनपीए घोषित कर चुका है।
इस राशि को पाने के लिए बैंक दीपक मित्तल व राखि मित्तल समेत कई अन्य संपत्तियों को नीलाम करने जा रहा है। इनमें सहस्रधारा रोड स्थित भूमि का काफी बड़ा हिस्सा भी है। इसके अलावा वो सब संपत्तियां भी हैं जहां पर कई तरह के प्रोजेक्ट चल रहे हैं। यह लोन पंजाब नेशनल बैंक इंदिरा नगर शाखा से लिया गया था।
पुष्पांजलि बिल्डर्स के डायरेक्टर दीपक मित्तल के खिलाफ धोखाधड़ी का एक और मुकदमा दर्ज हुआ है। यह मुकदमा कंपनी के ही एक अन्य डायरेक्टर ने डालनवाला कोतवाली में दर्ज कराया। आरोप है कि दीपक मित्तल ने कंपनी के अन्य डायरेक्टर को विश्वास में लेकर कंपनी का पैसा अपने कामों में लगाया। पुष्पांजलि बिल्डर्स प्रकरण में अब तक यह दूसरा मुकदमा है।
पुष्पांजलि बिल्डर्स के खिलाफ राजपुर थाने में एक महिला की शिकायत पर मुकदमा दर्ज हुआ था। महिला के साथ-साथ इस मामले में कुल 88 शिकायतें हैं। आरोप है कि पुष्पांजलि बिल्डर्स ने उनसे फ्लैट के लिए मोटी रकम वसूली और तय समय पर फ्लैट नहीं दिए। अब बताया जा रहा है कि दीपक मित्तल परिवार समेत दुबई भाग गया है। यहां पर कंपनी के ऑफिस आदि भी बंद हैं। साथ ही बाकी प्रोजेक्ट का काम भी बंद पड़ा हुआ है। मामले की जांच के लिए डीआईजी अरुण मोहन जोशी एसआईटी का गठन भी कर चुके हैं।
इधर, शुक्रवार शाम को ही कंपनी के एक अन्य डायरेक्टर राजपाल वालिया ने भी दीपक मित्तल के खिलाफ तहरीर दी। वालिया का कहना है कि कंपनी का काम कुछ दिनों से बहुत अच्छे से चल रहा था। लेकिन, पिछले साल अक्तूबर में दीपक ने अन्य डायरेक्टरों को विश्वास में लेना बंद कर दिया। वालिया के अनुसार दीपक ने बिना किसी को विश्वास में लिए ठेकेदार के साथ त्रिस्तरीय अनुबंध कर लिया। इसके तहत लोगों को फ्लैट जल्द दिलाने और ठेकेदार को भुगतान करने के लिए एस्क्रो अकाउंट खोले गए। इनमें खरीददार पैसे जमा कराते थे, जिनके माध्यम से काम आगे बढ़ता गया।
इस तरह इस अकाउंट में करीब 63 लाख रुपये एकत्र हो गए। इस बीच पता चला कि दीपक मित्तल ने इन अकाउंट से पैसे कंपनी के अकाउंट में ट्रांसफर करना शुरू कर दिए हैं। यही नहीं इस रकम को वह अपने काम में इस्तेमाल करता रहा। ऐसा करते जब उसे काफी समय हो गया तो इसका विरोध किया गया। लेकिन, एक दिन उसने फोन बंद कर लिए और किसी से संपर्क नहीं किया।
सिविल कोर्ट में भी दायर किया मुकदमा
वालिया के अनुसार उन्होंने दिसंबर 2019 में ही दीपक वालिया को ई-मेल के माध्यम से अपनी सहमति न दिए जाने को संपर्क किया था। लेकिन, जब वह नहीं माना तो उन्होंने एक मुकदमा सिविल कोर्ट में भी दाखिल कर दिया। दीपक मित्तल की इस हेराफेरी के कारण ही फ्लैट बनने में कठिनाई हो रही है।
शातिर दीपक मित्तल लंबे समय से लोगों का पैसा हड़पने की साजिश पर काम कर रहा था। उसके इरादों की भनक किसी को नहीं लग पाई थी। संपत्तियों को बचाने के लिए उसने कई परिजनों के नाम कर दी हैं। सूत्रों के मुताबिक इनमें वे परिजन शामिल हैं जिनका कंपनी से कोई लेना देना नहीं है।
दरअसल, किसी भी मामले में फरार चल रहे अभियुक्तों की संपत्ति के अटैचमेंट की सिफारिश भी की जाती है। ताकि, पीड़ित लोगों और सरकार के धन की भरपाई उसकी संपत्तियों से की जा सके। इसी से बचने के लिए मित्तल ने अपनी संपत्तियां परिजनों के नाम कर दी हैं।
सूत्रों के मुताबिक उसके पास जो सपंत्तियां थीं उन्हें वह अपने परिजनों के नाम कर चुका है। ये वो संपत्तियां हैं जो बैंक में बंधक नहीं रखी हुई हैं। राजपुर थाने में दर्ज मुकदमे में दीपक की पत्नी राखी भी आरोपी है। कारण है कि राखी भी पुष्पांजलि बिल्डर्स में पदाधिकारी है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस पूरी कोशिश कर रही है कि इन संपत्तियों को दीपक मित्तल से संबंधित दर्शाया जा सके।