गढ़वाल रेंज के पुलिस महानिरीक्षक के सरकारी वाहन में सवार होकर प्रॉपर्टी डीलर से लूटपाट के मामले में शनिवार को आरोपी निलंबित सिपाही हिमांशु उपाध्याय की भी जमानत मंजूर हो गई। मामले में आरोपी कांग्रेस नेता अनुपम शर्मा, निलंबित दरोगा दिनेश नेगी और सिपाही मनोज अधिकारी को पहले ही जमानत मिल चुकी है। एसटीएफ अब आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है।
राजपुर रोड पर चार अप्रैल की रात आईजी के सरकारी वाहन सवार दरोगा समेत तीन पुलिसकर्मियों ने आचार संहिता की आड़ में प्रॉपर्टी डीलर अनुरोध पंवार को आतंकित नोटाें से भरा बैग लूट लिया था। पीड़ित ने नौ अप्रैल को डालनवाला कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि कांग्रेस नेता अनुपम शर्मा के इशारे पर पुलिसकर्मियाें ने यह लूट की है। अधिकारियों ने जांच के बाद आईजी के वाहन का दुरुपयोग करने के आरोप में दरोगा दिनेश नेगी, सिपाही हिमांशु उपाध्याय और मनोज अधिकारी को निलंबित कर दिया था। बाद में विवेचना एसटीएफ को स्थानांतरित कर दी गई थी। एसटीएफ ने जांच के बाद कांग्रेस नेता अनुपम शर्मा, निलंबित दरोगा दिनेश नेगी, सिपाही हिमांशु और मनोज अधिकारी को जेल भेज दिया था। एसटीएफ की विवेचना में अब तक यह साफ नहीं हो सका है कि अनुरोध पंवार से लूटे गए बैग में कितनी रकम थी।
इस लूटकांड में आरोपी सिपाही हिमांशु उपाध्याय की जमानत अर्जी पर शनिवार को एडीजे प्रथम आरके खुल्वे की कोर्ट में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद अदालत ने हिमांशु की जमानत को स्वीकार कर लिया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता नीरज पांडेय का कहना था कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है। विवेचक अब तक उनके खिलाफ आरोप के समर्थन में किसी तरह के साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके हैं। इससे पहले कांग्रेस नेता अनुपम शर्मा, सिपाही मनोज अधिकारी और दरोगा दिनेश नेगी जमानत पर बाहर आ चुके हैं। एसटीएफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में जुटी है। उधर पुलिसकर्मियाें के खिलाफ चल रही बर्खास्तगी की कार्रवाई पर अभी कोई फैसला नहीं हो सका है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि विभागीय कार्रवाई प्रचलित है।