पूछताछ में आरोपी शेरद्दीन ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान आवश्यक सेवा की आड़ में तस्करी करने का आइडिया मेहूंवाला निवासी इमरान का था। उसी ने तस्करी के लिए उन्हें अपना ट्रक मुहैया कराया। इमरान ने आरोपियों को बताया था कि उसका आढ़त का काम है। इमरान ने उन्हें यह भी कहा कि उससे फोन पर बात करना। उसी के कहने पर वह स्मैक खरीदने के लिए अब्बास को नहीं ले गए थे। ट्रक मालिक का कहना था कि यदि तीन लोग जाएंगे तो पुलिस जगह-जगह पूछताछ करेगी।
ऐसे हुई गिरफ्तारी
आरोपी शेरद्दीन ने बताया कि उन्होंने बरेली जाकर आवश्यक सेवा की आड़ में फतेहगंज पश्चिमी बरेली में रहने वाले मामू नाम के व्यक्ति से 500 ग्राम स्मैक खरीदी। जिसके बाद उन्होंने मंडी से सब्जी खरीदी और ट्रक को हरबर्टपुर ले आए। 17 अप्रैल को शेरद्दीन और अशफाक के बीच तय हुआ कि 18 अप्रैल को अशफाक उसे धर्मावाला छोड़ देगा और खुद ट्रक को लेकर सहारनपुर चला जाएगा। इसके लिए उन्होंने ट्रक को हरबर्टपुर ग्राउंड में खड़ा कर दिया। 18 अप्रैल की सुबह जब उन्हें हरबर्टपुर से जाना था तो उनकी गाड़ी खराब हो गई। इंजन स्टॉर्ट नहीं हुआ। इस बीच पुलिस ने घेराबंदी कर उन्हें धर दबोचा।
गैंगेस्टर एक्ट में भी कार्रवाई
एसपी देहात ने बताया कि पूछताछ में प्रकाश में आए व्यक्तियों के खिलाफ साक्ष्य संकलन और बरेली के तस्कर को भी विवेचना में शामिल किया जा रहा है। उक्त सभी आरोपियों के खिलाफ गैंगेस्टर एक्ट में भी कार्रवाई की जाएगी।
कॉस्टेबल श्रीकांत ने निभाई अहम भूमिका
आरोपियों की गिरफ्तारी में कॉस्टेबल श्रीकांत मलिक ने अहम भूमिका निभाई। वह लंबे समय से ऐसे लोगों पर नजर रख रहा था जो क्षेत्र में स्मैक की सप्लाई कर रहे हैं। उसी के पास सबसे पहले ट्रक के जरिए स्मैक तस्करी की सूचना आई थी। जिसके बाद उसने मामले की जानकारी प्रभारी कोतवाल गिरीश नेगी को दी। जिसके बाद प्रभारी कोतवाल ने टीम गठित कर आरोपियों की तलाश तेज कर दी।
आईजी और एसएसपी ने कि इनाम की घोषणा
आरोपियों की गिरफ्तारी पर आईजी गढ़वाल ने टीम में शामिल पुलिस कर्मियों को पांच हजार रुपये और एसएसपी देहरादून ने 2500 रुपये के नकद इनाम की घोषणा की है।