दो फरवरी 2014 को एमएलसी की पत्नी अशोकलता के नाम से उसने रजिस्ट्री भी कर दी। जमीन का सीमांकन कराकर एमएलसी ने उसे छोड़ दिया। दिसंबर 2019 में उनके प्रार्थना पत्र पर डीएम ने टीम गठित कर पैमाइश कराई तो पता चला कि जमीन वन विभाग की है।
हरिद्वार ने फर्जी तरीके से खतौनी में अपना नाम दर्ज करा लिया था और एमएलसी को झांसा देकर उनकी पत्नी को बैनामा कर दिया। सीओ कैंपियरगंज दिनेश सिंह ने बताया कि एमएलसी देवेंद्र सिंह की तहरीर पर आरोपितों नवापार निवासी हरिद्वार दत्तक और उसके बेटे कृष्णा, बलराम, पौत्र अखिलेश, बृजेश व शैलेष के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।