ठगों की एक चूक उनकी गिरफ्तारी का कारण बन गई। गिरोह के सरगना ने दून की महिला से ठगी में प्रयोग सिम तो मोबाइल से निकाल दिया था। लेकिन उसी मोबाइल में अपनी असली आईडी पर खरीदा गया सिम डाल दिया। बस इसी एक सुराग ने पुलिस को आरोपियों तक पहुंचा दिया।
सोमवार को डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि टीम में सर्विलांस और फील्ड का अनुभव रखने वाले पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया था। ठगी में प्रयुक्त मोबाइल की अंतिम लोकेशन झारखंड के जमतारा जिले में पाई गई थी। लेकिन आईडी जनपद 24 परगना पश्चिमी बंगाल की थी। ठगी की रकम हड़पने को इस्तेमाल किए गए कुछ फर्जी पेटीएम वॉलेट की जानकारी भी मिली। इन खातों की आईडी लखनऊ और दिल्ली की थी। इसी आधार पर पुलिस टीमें झारखंड, पश्चिमी बंगाल, दिल्ली और लखनऊ भेजी गई। सिम की आईडी के आधार पर कई जगह दबिश दी गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। ज्यादातर पते फर्जी पाए गए। इसी बीच ठगी में प्रयोग हुए मोबाइल फिर चलने लगा। इसमें नया सिम डाला गया था।
यह सिम शरीद अंसारी निवासी ग्राम बदिया थाना करौं जनपद देवघर झारखंड के नाम था। दून पुलिस ने झारखंड पुलिस की मदद से शरीद अंसारी आदि के बारे में जानकारी जुटाई। देर रात दबिश देकर शरीद अंसारी उसके साथी तनवीर आलम और नबुवत अंसारी निवासी बदिया थाना करौं जनपद देवधर (झारखंड) को गिरफ्तार कर लिया गया। तीनों को कोर्ट में पेश कर ट्रांजिट रिमांड पर यहां लाया गया। पुलिस अधीक्षक नगर श्वेता चौबे भी इस दौरान मौजूद रहीं।
डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने बताया कि गैंग का सरगना शरीद अंसारी पहले पश्चिम बंगाल के आसनसोल जिले के होटल में काम करता था। बदिया, बस्कुपी और मदनकट्टा के अधिकतर लोग आनलाइन ठगी के गोरखधंधे में संलिप्त हैं। ठगों के ठाठ से प्रभावित होकर शरीद भी इस धंधे में उतर गया। ज्यादा पढ़ा लिखा न होने के कारण शरद ने अपने पड़ोसी नबुवत अंसारी और तनवीर आलम को साथ जोड़ लिया। नबुवत 12वीं तक पढ़ा होने के कारण कंप्यूटर का ज्ञान रखता था। तीनों ने मिलकर यह खेल शुरू किया।
पश्चिमी बंगाल से करते हैं सिम का इंतजाम
डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने आरोपियों से पूछताछ के आधार पर बताया कि ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले सिम पश्चिमी बंगाल के 24 परगना, मुर्शिदाबाद आदि जनपदों से जुटाए जाते थे। 500 से 900 रुपये गरीब लोगों को देकर उनसे आईडी हासिल की जाती है और उसी से सिम खरीदा जाता है। आरोपी हर घटना में नए सिम का प्रयोग करते थे। इनके पास 27 सिम ऐसे मिले हैं, जिनका का प्रयोग ठगी की घटनाओं में किया गया है। 20 सिम ऐसे हैं, जिनका प्रयोग अभी नहीं हुआ है। नौ मोबाइलाें के अलावा दून की टीना गुप्ता से हुई ठगी के 53 हजार रुपये बरामद हुए हैं।