फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

देहरादून पुलिस ने नक्सल प्रभावित इलाकों से तीन साइबर ठगों को दबोचा, पेटीएम के नाम पर लगाते थे चपत

Tue, 03 Mar 2020 12:03 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • झारखंड गई पुलिस टीम कामयाबी हासिल कर लौटी दून
  • पेटीएम केवाईसी के नाम पर महिला के खाते से उड़ाए थे 4.45 लाख
  • फर्जी आईडी के 47 सिम, नौ मोबाइल और 53 हजार की नगदी बरामद
विज्ञापन
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पेटीएम की केवाईसी के नाम पर देश भर में ठगी करने वाले तीन शातिर साइबर ठगों को नक्सल प्रभावित इलाकों से गिरफ्तार कर पुलिस टीम दून ले आई है। इन ठगों ने रायपुर क्षेत्र की एक महिला को झांसा देकर 4.45 लाख रुपये उड़ा लिए थे। इनके पास फर्जी आईडी पर लिए 47 सिम, नौ मोबाइल और 53 हजार रुपये की नगदी बरामद हुई है।

विज्ञापन


साइबर ठगी की बढ़ती वारदातों के मद्देनजर डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने इंस्पेक्टर देवेन्द्र चौहान की अगुवाई में 11 सदस्यीय गठित की थी। टीम को रायपुर क्षेत्र के तिरुपति एंकलेव निवासी टीना गुप्ता के खाते से रकम साफ करने वाले ठगों को गिरफ्तार करने का टास्क दिया गया था।

साथ ही डीआईजी ने खाली हाथ वापस नहीं लौटने की हिदायत दी थी। पुलिस टीम ने झारखंड पुलिस की मदद से करीब एक दर्जन लोगों को दबोचा था। इनमें से तीन दून की घटना से जुड़े थे। पुलिस तीनों आरोपियों को झारखंड से ट्रांजिट रिमांड पर लेकर दून पहुंच गई है।

विज्ञापन

एक चूक ने ठगों की पहुंचा दिया जेल 

ठगों की एक चूक उनकी गिरफ्तारी का कारण बन गई। गिरोह के सरगना ने दून की महिला से ठगी में प्रयोग सिम तो मोबाइल से निकाल दिया था। लेकिन उसी मोबाइल में अपनी असली आईडी पर खरीदा गया सिम डाल दिया। बस इसी एक सुराग ने पुलिस को आरोपियों तक पहुंचा दिया। 

सोमवार को डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि टीम में सर्विलांस और फील्ड का अनुभव रखने वाले पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया था। ठगी में प्रयुक्त मोबाइल की अंतिम लोकेशन झारखंड के जमतारा जिले में पाई गई थी।  लेकिन आईडी जनपद 24 परगना पश्चिमी बंगाल की थी। ठगी की रकम हड़पने को इस्तेमाल किए गए कुछ फर्जी पेटीएम वॉलेट की जानकारी भी मिली। इन खातों की आईडी लखनऊ और दिल्ली की थी। इसी आधार पर पुलिस टीमें झारखंड, पश्चिमी बंगाल, दिल्ली और लखनऊ भेजी गई। सिम की आईडी के आधार पर कई जगह दबिश दी गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। ज्यादातर पते फर्जी पाए गए। इसी बीच ठगी में प्रयोग हुए मोबाइल फिर चलने लगा। इसमें नया सिम डाला गया था। 

यह सिम शरीद अंसारी निवासी ग्राम बदिया थाना करौं जनपद देवघर झारखंड के नाम था। दून पुलिस ने झारखंड पुलिस की मदद से शरीद अंसारी आदि के बारे में जानकारी जुटाई। देर रात दबिश देकर शरीद अंसारी उसके साथी तनवीर आलम और नबुवत अंसारी निवासी बदिया थाना करौं जनपद देवधर (झारखंड) को गिरफ्तार कर लिया गया। तीनों को कोर्ट में पेश कर ट्रांजिट रिमांड पर यहां लाया गया। पुलिस अधीक्षक नगर श्वेता चौबे भी इस दौरान मौजूद रहीं। 
विज्ञापन

ऐसे करते थे पढ़े लिखों से ठगी

डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने बताया कि गैंग का सरगना शरीद अंसारी पहले पश्चिम बंगाल के आसनसोल जिले के होटल में काम करता था। बदिया, बस्कुपी और मदनकट्टा के अधिकतर लोग आनलाइन ठगी के गोरखधंधे में संलिप्त हैं। ठगों के ठाठ से प्रभावित होकर शरीद भी इस धंधे में उतर गया। ज्यादा पढ़ा लिखा न होने के कारण शरद ने अपने पड़ोसी नबुवत अंसारी और तनवीर आलम को साथ जोड़ लिया। नबुवत 12वीं तक पढ़ा होने के कारण कंप्यूटर का ज्ञान रखता था। तीनों ने मिलकर यह खेल शुरू किया। 

पश्चिमी बंगाल से करते हैं सिम का इंतजाम
डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने आरोपियों से पूछताछ के आधार पर बताया कि ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले सिम पश्चिमी बंगाल के 24 परगना, मुर्शिदाबाद आदि जनपदों से जुटाए जाते थे। 500 से 900 रुपये गरीब लोगों को देकर उनसे आईडी हासिल की जाती है और उसी से सिम खरीदा जाता है। आरोपी हर घटना में नए सिम का प्रयोग करते थे। इनके पास 27 सिम ऐसे मिले हैं, जिनका का प्रयोग ठगी की घटनाओं में किया गया है। 20 सिम ऐसे हैं, जिनका प्रयोग अभी नहीं हुआ है। नौ मोबाइलाें के अलावा दून की टीना गुप्ता से हुई ठगी के 53 हजार रुपये बरामद हुए हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें