डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने बताया कि शातिर अपराधी अनिल पहलवान के फायरिंग करने की आशंका के चलते पहले दून विहार के इलाके को सील करने के साथ बुलेट प्रूफ जाकेट के साथ पुलिसकर्मियों को आवास के दोनों तरफ लगाया गया। बृहस्पतिवार रात दून विहार में मकान नंबर 259 से आरोपी अनिल को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास से 32 बोर की पिस्टल के साथ कार भी बरामद हुई। उसे नेहरू कालोनी थाने लाकर पूछताछ की गई। पता चला कि अनिल पहलवान करीब एक साल से दून विहार में कमरा किराए पर लेकर रह रहा था।
लंबी है पहलवान के जुर्म की फेहरिश्त
अनिल पहलवान ने बीच में पढ़ाई छोड़कर रिश्ते के भाई बबलू के साथ नागल में जिम खोला था। बबलू ने अपनी पत्नी के ब्वाय फ्रेंड का कत्ल कर दिया था। बबलू के पीछे-पीछे अनिल भी अपराध की राह पर चल पड़ा। उसने 2011 में पहली बार कार लूट की थी।
2011 में ही अनिल ने आनंद कालेज के एक छात्र का अपहरण कर एक करोड़ की फिरौती वसूली थी। बहादुरगढ़ के एक प्रोफेसर की रिहाई के बदले भी 20 लाख रुपये वसूले थे। अनिल के साथी मनोज मोरखेड़ी के मौसी के लड़के को इंस्पेक्टर रामकिशन दहिया ने एनकाउंटर में मार दिया था। अनिल और मनोज ने 2013 में रोहतक सिटी में इंस्पेक्टर रामकिशन दहिया की हत्या कर एनकाउंटर का बदला लिया था।
सरपंच के अलावा रेलवे कर्मचारी सतीश उर्फ काना की हत्या में भी उसका हाथ रहा है। 2014 में दिल्ली क्राइम ब्रांच ने आरोपी को पकड़ा था। 2017 में पैरोल पर बाहर आया तो एक डिस्को क्लब के संचालक से 50 लाख की रंगदारी मांगी थी। 2018 केअंत में अनिल पहलवान दोबारा पैरोल पर बाहर आया था और तब से फरार चल रहा था। दुस्साहिसक घटनाओं के चलते दिल्ली पुलिस ने अनिल और इसके गैंग के सदस्यों को मकोका में भी निरुद्ध किया था।
आईजी अजय रौतेला ने एक लाख रुपये के इनामी अनिल पहलवान को गिरफ्तार करने वाली टीम में शामिल रहे एसपी देहात प्रमेन्द्र डोभाल, एसपी सिटी श्वेता चौबे, सीओ विकासनगर भूपेन्द्र सिंह धोनी, आईजी आफिस में तैनात उप निरीक्षक मोहम्मद यासीन, इंस्पेक्टर यशपाल बिष्ट, एसओजी प्रभारी ऐश्वर्य पाल, एसओ नेहरू कालोनी दिलबर नेगी, उप निरीक्षक आशीष रावत, एसओजी के मोहन, देवेन्द्र ममगांई, ललित, अमित, देवेन्द्र, विपिन, अभिषेक आदि को पांच हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है।